मानसून के दौरान सभी विभाग रहें 24×7 अलर्ट मोड पर: विनय रुहेला

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / राहुल गिरी,
देहरादून। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने बुधवार को कोषागार सभागार में मानसून तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
बैठक में लोक निर्माण, सिंचाई, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पुलिस, नगर निगम, वन, जल संस्थान, एसडीआरएफ सहित विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई। रुहेला ने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी, नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखने और आपदा की सूचना पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों के किनारे बसे इलाकों और अवरुद्ध सड़कों को प्राथमिकता से सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
उन्होंने पीडब्ल्यूडी, एनएच और पीएमजीएसवाई को जेसीबी व अन्य मशीनरी पहले से तैनात रखने, निर्माणाधीन सड़कों का मलबा निर्धारित डंपिंग जोन में ही डालने तथा सड़क गड्ढों को तत्काल भरने के निर्देश दिए। नगर निगम को नालों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों में जल निकासी और सिंचाई विभाग को नदियों के जलस्तर की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
स्वास्थ्य विभाग को दवाइयों, एंबुलेंस, मेडिकल टीमों और डेंगू, मलेरिया व डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव की समुचित व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए। वहीं विद्युत, पेयजल और वन विभाग को जर्जर पोल, झूलती विद्युत लाइनों, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों तथा सड़कों पर झुके पेड़ों को समय रहते दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि जिले में आपदा संभावित क्षेत्रों में 66 जेसीबी तैनात की गई हैं तथा राहत, ड्रेनेज और नदी चौनलाइजेशन सहित आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बैठक के बाद उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने कलेक्ट्रेट परिसर में पौधारोपण भी किया।
बैठक में लोक निर्माण, सिंचाई, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पुलिस, नगर निगम, वन, जल संस्थान, एसडीआरएफ सहित विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई। रुहेला ने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी, नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखने और आपदा की सूचना पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों के किनारे बसे इलाकों और अवरुद्ध सड़कों को प्राथमिकता से सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
उन्होंने पीडब्ल्यूडी, एनएच और पीएमजीएसवाई को जेसीबी व अन्य मशीनरी पहले से तैनात रखने, निर्माणाधीन सड़कों का मलबा निर्धारित डंपिंग जोन में ही डालने तथा सड़क गड्ढों को तत्काल भरने के निर्देश दिए। नगर निगम को नालों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों में जल निकासी और सिंचाई विभाग को नदियों के जलस्तर की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
स्वास्थ्य विभाग को दवाइयों, एंबुलेंस, मेडिकल टीमों और डेंगू, मलेरिया व डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव की समुचित व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए। वहीं विद्युत, पेयजल और वन विभाग को जर्जर पोल, झूलती विद्युत लाइनों, क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों तथा सड़कों पर झुके पेड़ों को समय रहते दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि जिले में आपदा संभावित क्षेत्रों में 66 जेसीबी तैनात की गई हैं तथा राहत, ड्रेनेज और नदी चौनलाइजेशन सहित आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बैठक के बाद उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने कलेक्ट्रेट परिसर में पौधारोपण भी किया।
