हरिद्वार में ‘’वेज बिरयानी’’ के नाम पर विवाद, संतों ने चलाया ‘’वेज पुलाव’’ अभियान

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में खाद्य पदार्थों के नामकरण को लेकर नया विवाद सामने आया है। अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में साधु-संतों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाकर ‘वेज बिरयानी’ नाम से लगाए गए बोर्डों और होर्डिंग्स का विरोध किया। इस दौरान कई दुकानों और ठेलियों पर ‘वेज बिरयानी’ के स्थान पर ‘वेज पुलाव’ के स्टिकर लगाए गए तथा दुकानदारों से भविष्य में नाम परिवर्तन करने की अपील की गई।
अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने बताया कि संगठन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि वेज पुलाव को ‘वेज बिरयानी’ के नाम से बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी है और आगामी कांवड़ मेला तथा 2027 के महाकुंभ को देखते हुए इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य किसी के व्यापार का विरोध नहीं, बल्कि तीर्थनगरी की पहचान को संरक्षित करना है।
स्वामी कार्तिक गिरी महाराज ने कहा कि संत समाज किसी के रोजगार के खिलाफ नहीं है। उनका विरोध केवल खाद्य पदार्थ के नाम को लेकर है। उन्होंने दुकानदारों से आग्रह किया कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर ‘वेज पुलाव’ लिखें और उसी नाम से खाद्य पदार्थ बेचें।
कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण आचार्य ने बताया कि इस विषय पर संगठन लंबे समय से सोशल मीडिया के माध्यम से भी जनजागरण कर रहा था। अपेक्षित बदलाव न होने पर अब संत समाज ने सीधे दुकानदारों से संवाद का रास्ता अपनाया है।
अभियान में स्वामी कार्तिक गिरी, पवन कृष्ण आचार्य, कमल मुनि महाराज, स्वामी चौतन्य महाराज, स्वामी राधा माधव, स्वामी श्याम गिरि, रोहित गिरि, ऋषि शर्मा, यशपाल शर्मा और कुलदीप शर्मा सहित अनेक संत एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
