पोल्ट्री फार्म से आत्मनिर्भर बनीं चैतादेवी, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

टिहरी। विकासखंड भिलंगना के थाती गांव की निवासी चैतादेवी ने अपनी मेहनत, लगन और रीप परियोजना के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। भैरवनाथ स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य चैतादेवी आज सफल महिला उद्यमी के रूप में क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। सीमित आय के कारण पहले उनका परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहा था, लेकिन स्वरोजगार की दृढ़ इच्छा और निरंतर प्रयासों ने उनके जीवन को नई दिशा दी।
रीप परियोजना के तहत उन्हें 22,500 की वित्तीय सहायता मिली। इसके अलावा उन्होंने बैंक से 37,500 का ऋण लिया और 15,000 अपनी बचत से जोड़कर कुल 75,000 की लागत से गांव में मदर यूनिट पोल्ट्री फार्म स्थापित किया। वर्तमान में उनके फार्म में करीब 100 मुर्गियां हैं, जिनका आधुनिक तरीके से पालन-पोषण किया जा रहा है। फार्म से उन्हें अंडा उत्पादन, चूजों की बिक्री और तैयार मुर्गियों के विक्रय से नियमित आय हो रही है। प्रति सप्ताह लगभग 400 अंडों का उत्पादन होता है, जबकि स्थानीय बाजार में मुर्गियों और चूजों की बिक्री से भी अच्छी आमदनी प्राप्त होती है। इस आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब वे भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया कि रीप परियोजना और पशुपालन विभाग के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। विभाग द्वारा कुक्कुट पालकों को प्रशिक्षण, निःशुल्क चिकित्सा सुविधा और दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जनपद में कुक्कुट पालन आजीविका का प्रभावी माध्यम बन रहा है और चौतादेवी जैसी महिलाएं अन्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी सफलता महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण आजीविका विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।
