नवाचार आधारित शिक्षा मॉडल पर उत्तराखंड का फोकस, शिक्षा मंत्री ने साझा की कार्ययोजना

विकास गर्ग / उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
नई दिल्ली/देहरादून। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आयोजित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत राज्य की उपलब्धियों, नवाचारों और भविष्य की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे।
नई दिल्ली स्थित आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और तकनीक आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 99.53 प्रतिशत विद्यालयों में भवन, 99.45 प्रतिशत में पेयजल, 96.83 प्रतिशत में बिजली, 98.23 प्रतिशत में पर्याप्त फर्नीचर, 94.64 प्रतिशत में पुस्तकालय तथा 87.83 प्रतिशत विद्यालयों में दिव्यांगजन अनुकूल रैम्प उपलब्ध हैं। सभी विद्यालयों में बालिका शौचालय की सुविधा भी सुनिश्चित की जा चुकी है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में 1238 क्लस्टर स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 1367 स्मार्ट कक्षाएं, 1340 वर्चुअल क्लास और कौशल शिक्षा कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों और परिवहन सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने माध्यमिक स्तर पर 93.4 प्रतिशत और उच्च माध्यमिक स्तर पर 80.2 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात हासिल किया है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक विद्यार्थी को कक्षा 12 तक कम से कम एक कौशल में दक्ष बनाना है। इसके लिए एक हजार से अधिक विद्यालयों में कौशल आधारित शिक्षा संचालित की जा रही है। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य में शत-प्रतिशत अपार आईडी, बेहतर लर्निंग आउटकम, शिक्षकों के सतत प्रशिक्षण तथा विद्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से समग्र शिक्षा अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
नई दिल्ली स्थित आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और तकनीक आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 99.53 प्रतिशत विद्यालयों में भवन, 99.45 प्रतिशत में पेयजल, 96.83 प्रतिशत में बिजली, 98.23 प्रतिशत में पर्याप्त फर्नीचर, 94.64 प्रतिशत में पुस्तकालय तथा 87.83 प्रतिशत विद्यालयों में दिव्यांगजन अनुकूल रैम्प उपलब्ध हैं। सभी विद्यालयों में बालिका शौचालय की सुविधा भी सुनिश्चित की जा चुकी है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में 1238 क्लस्टर स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 1367 स्मार्ट कक्षाएं, 1340 वर्चुअल क्लास और कौशल शिक्षा कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों और परिवहन सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने माध्यमिक स्तर पर 93.4 प्रतिशत और उच्च माध्यमिक स्तर पर 80.2 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात हासिल किया है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक विद्यार्थी को कक्षा 12 तक कम से कम एक कौशल में दक्ष बनाना है। इसके लिए एक हजार से अधिक विद्यालयों में कौशल आधारित शिक्षा संचालित की जा रही है। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य में शत-प्रतिशत अपार आईडी, बेहतर लर्निंग आउटकम, शिक्षकों के सतत प्रशिक्षण तथा विद्यालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से समग्र शिक्षा अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
