सहकारिता क्षेत्र में बड़े सुधारों की तैयारी, उत्कृष्ट राज्यों के मॉडल का अध्ययन करेगी 5 सदस्यीय समिति


देहरादून। प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सहकारी बैंकों को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यमुना कॉलोनी स्थित शासकीय आवास में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने जिला सहकारी बैंकों और राज्य सहकारी बैंक की वेतन संरचना, मानव संसाधन प्रबंधन तथा वित्तीय व्यवस्थाओं के अध्ययन हेतु 5 सदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति देश के उत्कृष्ट सहकारी बैंकिंग मॉडलों का अध्ययन कर एक माह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
बैठक में सहकारी बैंकों की एनपीए स्थिति की समीक्षा करते हुए बकाया ऋणों की वसूली के लिए प्रभावी रणनीति बनाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि वित्तीय मजबूती के लिए एनपीए नियंत्रण सर्वाेच्च प्राथमिकता है। यूसीएफ की निरंजनपुर स्थित बहुमूल्य भूमि के व्यावसायिक उपयोग, तीन नए जिला सहकारी बैंकों की स्थापना और “एक बैंक-एक रंग” अवधारणा के तहत समान कलर कोड व ड्रेस कोड लागू करने पर भी चर्चा हुई।
ऊर्जा बचत के लिए सभी सहकारी संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाने तथा ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल ट्रांजैक्शन जैसी आधुनिक सुविधाएं शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए गए। डॉ. रावत ने कहा कि सहकारी बैंकों के लिए दीर्घकालिक व्यावसायिक रोडमैप तैयार कर उन्हें आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा। बैठक में सचिव सहकारिता डॉ. इकबाल अहमद, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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