वॉइस ऑफ मीडिया अधिवेशन में पारित हुए कई अहम प्रस्ताव


देहरादून/नई दिल्ली। पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और बदलते दौर की डिजिटल पत्रकारिता को नई दिशा देने के उद्देश्य से वॉइस ऑफ मीडिया एवं वॉइस ऑफ मीडिया इंटरनेशनल फोरम का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन नई दिल्ली स्थित विश्व युवा केंद्र में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों पत्रकारों, संगठन पदाधिकारियों और मीडिया विशेषज्ञों ने पत्रकारिता के समक्ष मौजूद चुनौतियों, अवसरों और भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक मंथन किया। अधिवेशन में पत्रकार सुरक्षा कानून, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, डिजिटल मीडिया, कौशल विकास और संगठन विस्तार सहित अनेक विषयों पर महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
अधिवेशन का शुभारंभ संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप काले, राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल म्हास्के, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक वानखेडे सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बदलते समय के साथ पत्रकारों को नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ निष्पक्षता, विश्वसनीयता और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को भी बनाए रखना होगा।
विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मीडिया विशेषज्ञ गगनजी महोत्रा ने डिजिटल पत्रकारिता और सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद सोशल मीडिया ने समाचारों के प्रसार की दिशा बदल दी है। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पत्रकारों के लिए प्रभावी माध्यम बन चुके हैं, लेकिन इनके उपयोग में सत्यता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पत्रकारों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित आधुनिक तकनीकों का सकारात्मक उपयोग कर अपनी कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

पत्रकारिता कभी समाप्त नहीं हो सकती: अशोक

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक वानखेडे ने कहा कि पत्रकारिता कभी समाप्त नहीं हो सकती क्योंकि समाज को सत्य से जोड़ने का दायित्व पत्रकार ही निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और वॉइस ऑफ मीडिया वैश्विक स्तर पर पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने तथा पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।

कई विषयों पर हुई चर्चा

अधिवेशन में पत्रकार सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, कौशल विकास, पेंशन, पत्रकारों पर बढ़ते हमलों की रोकथाम, डिजिटल पत्रकारिता के लिए प्रशिक्षण तथा संगठन विस्तार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की चुनौतियों और अनुभव साझा करते हुए संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

पत्रकारों के बच्चों के लिए दी शिक्षा संबंधी जानकारी

महाराष्ट्र शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रमुख चेतन कात्रे ने पत्रकारों के बच्चों के लिए शिक्षा संबंधी योजनाओं की जानकारी दी, जबकि स्वास्थ्य प्रकोष्ठ के प्रमुख भीमेश मुतुला ने पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं और चिकित्सा सुविधाओं पर मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर दिगंबर महाले को संगठन का राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष चुना गया। देशभर से आए पत्रकारों का सम्मान भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक वानखेडे के हाथों किया गया।

कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित

अधिवेशन के समापन सत्र में पत्रकारों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करना, पत्रकारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने से पूर्व सत्यापन समिति का गठन, व्यापक स्वास्थ्य बीमा एवं आयुष्मान भारत योजना का लाभ, दुर्घटना बीमा, पेंशन में वृद्धि, डिजिटल पत्रकारों को भी पेंशन का लाभ, किफायती आवास, प्रत्येक जिले में पत्रकार भवन की स्थापना, राष्ट्रीय पत्रकार कल्याण महामंडल का गठन, नियमित कौशल विकास एवं एआई आधारित प्रशिक्षण, डिजिटल मीडिया के लिए अलग कानून, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों को विशेष संरक्षण, पत्रकारों के अधिकारों का कानूनी संरक्षण, लघु समाचार पत्रों को प्रोत्साहन, मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों का प्रभावी क्रियान्वयन, प्रेस परिषद में वॉइस ऑफ मीडिया को प्रतिनिधित्व तथा रेल यात्रा रियायत की पुनर्बहाली जैसी प्रमुख मांगें शामिल रहीं।

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