वैश्विक मान्यता के कारण आयुष क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय वृद्धि: देबाशीष पांडा
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / उदित पांडे,

देहरादून। सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र में भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से “आयुष एवं हर्बल के लिए एफटीए का लाभ उठाना और उत्तराखंड के लिए अवसर” विषय पर क्षेत्रीय आउटरीच कार्यक्रम एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुष एवं हर्बल क्षेत्र से जुड़े निर्यातकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, निर्माताओं और अन्य हितधारकों को मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों और वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुष मंत्रालय के संयुक्त सलाहकार देबाशीष पांडा ने कहा कि नीतिगत सुधारों, गुणवत्ता आश्वासन उपायों और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मिल रही वैश्विक मान्यता के कारण आयुष क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल, वेलनेस और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों के प्रति दुनिया भर में बढ़ती रुचि भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।
वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित वर्मा ने कहा कि पिछले एक दशक में व्यापार सुगमीकरण, डिजिटल परिवर्तन, निर्यात प्रोत्साहन और मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से भारत के निर्यात तंत्र को मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सुधार और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने से भारतीय निर्यात को नई गति मिली है तथा आयुष क्षेत्र को निर्यात संवर्धन की प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।
कार्यक्रम मेंबाजार अनुसंधान, क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीय खरीदार-विक्रेता संपर्क, नियामक अनुपालन और निर्यात सहायता संबंधी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को आयुष उत्पादों, औषधीय पौधों, हर्बल अर्क, न्यूट्रास्यूटिकल्स और वेलनेस सेवाओं के लिए वैश्विक बाजारों में उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी दी गई।
उत्तराखंड के औषधीय एवं सुगंधित पौधों के समृद्ध संसाधन आधार और मजबूत आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हुए कार्यक्रम स्थानीय उद्यमियों और उद्योग जगत के लिए उपयोगी मंच साबित हुआ। इंटरैक्टिव सत्र में प्रतिभागियों ने निर्यात प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन व्यवस्था और बाजार पहुंच से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया। कार्यक्रम का समापन प्रेस वार्ता और हितधारक संवाद के साथ हुआ, जिसमें आयुष क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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