परीक्षा व्यवस्था में किए बड़े बदलाव, निजी कॉलेजों के शिक्षक नहीं बनाएंगे प्रश्नपत्र

देहरादून। वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) ने हालिया पेपर लीक प्रकरण के बाद परीक्षा प्रणाली की शुचिता, गोपनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने घोषणा की कि अब निजी कॉलेजों के शिक्षकों को प्रश्नपत्र निर्माण (पेपर सेटिंग) और परीक्षा से जुड़े अन्य गोपनीय कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा।
कुलपति ने बताया कि पेपर लीक मामले को विश्वविद्यालय ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल परीक्षा नियंत्रक को पद से हटा दिया है। साथ ही आरोपी निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक द्वारा तैयार किया गया दूसरा प्रश्नपत्र भी एहतियातन निरस्त कर दिया गया, ताकि परीक्षा की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे। जांच में सामने आया कि आरोपी शिक्षक ने अपने ही कॉलेज, शिवालिक इंजीनियरिंग कॉलेज, के 22 छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था।
विश्वविद्यालय ने संबंधित निजी इंजीनियरिंग कॉलेज को कड़ी चेतावनी जारी की है तथा आरोपी शिक्षक को विश्वविद्यालय के सभी परीक्षा संबंधी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया गया है। मामले में आरोपी शिक्षक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की संस्तुति की गई है और उसे जेल भेज दिया गया है। डॉ. तृप्ता ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में प्रभावी सुधार लागू कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के हित सर्वाेपरि हैं और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
