सफलता की कहानी: मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भर बनीं मंजू देवी, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

प्रदीप कुमार।
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद विकासखंड कीर्तिनगर के ग्राम बंडाशा निवासी मंजू देवी ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में सफलता हासिल कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। प्रगतिशील स्वयं सहायता समूह की सदस्य मंजू देवी आज न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
शुरुआत में मंजू देवी ने घर के एक छोटे कमरे में मशरूम उत्पादन शुरू किया, लेकिन तकनीकी जानकारी के अभाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने रीप परियोजना और कृषि विज्ञान केंद्र रानीचौरी द्वारा आयोजित मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने गुणवत्तापूर्ण स्पॉन का चयन, सब्सट्रेट तैयार करना, तापमान एवं नमी का प्रबंधन, रोग नियंत्रण और विपणन जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण के बाद आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने बेहतर गुणवत्ता वाले मशरूम का उत्पादन शुरू किया। उनके उत्पाद की स्थानीय बाजारों और रेस्तरां में अच्छी मांग बनने लगी। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और मशरूम की विभिन्न किस्मों का उत्पादन भी शुरू कर दिया। आज मशरूम उत्पादन उनके परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है, जिससे आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है।
मंजू देवी की सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र की कई महिलाएं भी मशरूम उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ रही हैं। वे समय-समय पर अपने अनुभव साझा कर महिलाओं को प्रशिक्षण लेने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि सही प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।
मंजू देवी की उपलब्धि महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण आजीविका का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, सीखने की इच्छा और सही मार्गदर्शन के बल पर हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। आज उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पूरे क्षेत्र में स्थापित हो चुकी है।
