सिलाई सेंटर से आत्मनिर्भर बनीं प्रियंका देवी, सुई-धागे से बुन रहीं सफलता की नई कहानी
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / प्रदीप कुमार,
चमोली। जनपद के विकासखंड कर्णप्रयाग अंतर्गत ग्राम कांडा, गौचर निवासी प्रियंका देवी आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनकर उभरी हैं। आत्मविश्वास, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने आर्थिक चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए स्वरोजगार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। स्वयं सहायता समूह और उड़ान सीएलएफ से जुड़ी प्रियंका देवी ने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का सपना देखा और उसे साकार करने के लिए निरंतर प्रयास किए।
उनकी इस यात्रा में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परियोजना के सहयोग से प्रियंका देवी ने अपने गांव में सिलाई सेंटर की स्थापना की। इस उद्यम की कुल लागत तीन लाख रुपये रही, जिसमें 75 हजार रुपये परियोजना सहायता, डेढ़ लाख रुपये बैंक ऋण तथा 75 हजार रुपये स्वयं का अंशदान शामिल रहा। आर्थिक सहयोग मिलने के बाद उन्होंने आधुनिक सिलाई मशीनें खरीदीं और अपने व्यवसाय की शुरुआत की।
शुरुआत में सीमित संसाधनों और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन प्रियंका देवी ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी लगन और मेहनत का परिणाम यह रहा कि धीरे-धीरे उनके सिलाई सेंटर की पहचान बनने लगी। आज आसपास के गांवों से लोग स्कूल यूनिफॉर्म, महिलाओं के परिधान तथा अन्य सिलाई कार्यों के लिए उनके सेंटर पर पहुंचते हैं। बढ़ती मांग के कारण उनका व्यवसाय लगातार विस्तार की ओर अग्रसर है।
वर्तमान में प्रियंका देवी अपने सिलाई सेंटर से प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इस आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की शिक्षा सहित घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। उनकी सफलता ने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है।
प्रियंका देवी का कहना है कि ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग के बिना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना आसान नहीं था। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा परियोजना से जुड़े सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने और सम्मानजनक आजीविका प्राप्त करने का अवसर दिया। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।

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