नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन के अंतिम दिन एमटीबी चैलेंज में दिखा रोमांच
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / कमलेश पुरोहित,
चमोली। नीति घाटी में आयोजित तीन दिवसीय नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन के अंतिम दिन गमसाली से मलारी के बीच 30 किलोमीटर एमटीबी (माउंटेन बाइकिंग) चौलेंज का आयोजन किया गया। दुर्गम पहाड़ी मार्गों और चुनौतीपूर्ण ट्रैक पर देशभर से आए 100 से अधिक प्रतिभागियों ने दमखम दिखाया। पुरुष वर्ग में खरिकसिंग अडॉनिस तांगपू प्रथम, सूरज राणा मगर द्वितीय और प्रकाश थापा मगर तृतीय रहे। महिला वर्ग में अवनी डरियाल ने पहला, संध्या मौर्या ने दूसरा और इंद्रा कुमारी तमांग ने तीसरा स्थान हासिल किया। 15 किमी पुरुष वर्ग में प्रज्वल चौहान विजेता रहे, जबकि महिला वर्ग में प्रिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। पर्यटन विभाग, भारतीय सेना और आईटीबीपी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 27 राज्यों के 1200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। आयोजन ने सीमांत क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को नई पहचान दी।

नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026 ने नीति घाटी को दिलाई नई पहचान
चमोली। सीमांत एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नीति घाटी में आयोजित नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026 ने उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 31 मई से 2 जून तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता ने साहस, खेल भावना और पर्यटन विकास का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। हिमालयी ऊंचाइयों, कठिन ट्रैक और प्रतिकूल मौसम के बीच आयोजित इस आयोजन में देशभर से आए प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया।
उत्तराखंड पर्यटन विभाग और भारतीय सेना के संयुक्त सहयोग से आयोजित प्रतियोगिता में 75 किमी अल्ट्रा रन, 42 किमी मैराथन, 21 किमी हाफ मैराथन, 10 व 5 किमी रन तथा एमटीबी चौलेंज जैसी प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। भारतीय सेना ने सुरक्षा, चिकित्सा, संचार, भोजन और आवास जैसी व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित कर आयोजन की सफलता सुनिश्चित की।
इस आयोजन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला। होमस्टे, परिवहन, दुकानदारों और स्वयं सहायता समूहों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा, जबकि स्थानीय युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे जनोत्सव का स्वरूप दिया। प्रतिभागियों ने नीति घाटी की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और आतिथ्य की सराहना की।
नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026 ने साबित किया कि सीमांत क्षेत्रों में भी विश्वस्तरीय साहसिक खेल आयोजन सफलतापूर्वक किए जा सकते हैं। यह आयोजन पर्यटन, रोजगार और सीमांत विकास के नए अवसरों का द्वार खोलते हुए नीति घाटी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सफल रहा।

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