पशुधन प्रसार केन्द्र नहीं होने से पशुपालकों को हो रही है परेशानी

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो
रानीखेत । देवभूमि उत्तराखंड कृषि प्रधान होने के साथ साथ यहाँ की ग्रामीण जनता पशुपालन द्वारा अपनी जीविकोपार्जन करती है। देखा जाय तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन व कृषि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विकासखण्ड ताड़ीखेत के सुदूरवर्ती न्याय पंचायत मुख्यालय चौकुनी में पशुधन प्रसार केन्द्र का संचालन पूर्व में होता था किन्तु कुछ वर्ष पूर्व पशुधन प्रसार केन्द्र को बंद कर दिया गया था। क्षेत्र में पशुधन प्रसार केन्द्र नहीं होने से पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ज्ञात हो कि न्याय पंचायत मुख्यालय चौकुनी में स्थित पशुधन प्रसार केन्द्र बहुत पुराना केन्द्र रहा है। न्याय पंचायत चौकुनी के दर्जनों गाँवों के पशुपालकों को पशुपालन संबंधी कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं के विभिन्न रोगों में दवाईयाँ, पशु टीकाकरण आदि का लाभ मिलता था। किन्तु काफी लंबे समय से चौकुनी स्थित पशुधन प्रसार केन्द्र बंद पड़ा हुआ है। क्षेत्रीय पशुपालकों का कहना है कि इस केन्द्र के बंद होने से उन्हें बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के लिए पशुपालकों को सबसे अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालकों के अनुसार उन्हें पशुओं के लिए दवाईयाँ टीकाकरण व अन्य परामर्श के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। न्याय पंचायत मुख्यालय चौकुनी में बंद पड़े पशुधन प्रसार केन्द्र पर विभिन्न गांवों जिसमें चौकुनी, कलौना, मौना, नावली, म्वाण, मकड़ो, पिपलटाना, गढ़ोली, चमना, सहित न्याय पंचायत चौकुनी के अनेक गाँवों के पशुपालक निर्भर रहते हैं। पशुधन प्रसार केन्द्र नहीं होने के कारण इन गाँवों के पशुपालकों को काफी अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालकों ने क्षेत्र में पशुधन प्रसार केन्द्र शीघ्र खोलने की मांग की है।
