जल स्रोत संरक्षण व नदी पुनर्जीवन कार्यों के धरातलीय प्रभाव को दें प्राथमिकता

टिहरी। जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जल स्रोत एवं नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण (सारा) की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक हुई। बैठक में जल स्रोत संरक्षण, भूजल संवर्धन और सोंग नदी पुनर्जीवन से संबंधित प्रस्तावों एवं डीपीआर की समीक्षा की गई।
डीएम ने अधिकारियों को पूर्व में किए गए कार्यों के धरातलीय प्रभाव का आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल कार्य पूर्ण होना पर्याप्त नहीं, बल्कि जल स्रोतों के डिस्चार्ज, जल उपलब्धता और स्थानीय लाभ का भी आकलन किया जाए। एक जनपद-एक नदी कार्यक्रम के तहत सोंग नदी का चयन किया गया है। उन्होंने ऐतिहासिक जलधाराओं और नौलों के पुनरुद्धार कार्यों को पेयजल योजनाओं से जोड़ने, सभी जल स्रोतों का वैज्ञानिक चिन्हीकरण तथा प्राथमिकता वाले सब-वाटरशेड क्षेत्रों की माइक्रोप्लानिंग के निर्देश दिए। चेकडैम, चाल-खाल, रिचार्ज पिट, तालाब और पौधरोपण कार्यों की जियोटैगिंग व डिजिटल मॉनिटरिंग पर भी जोर दिया गया। बैठक में सीडीओ वरुणा अग्रवाल समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
