गुरु शाश्वत चेतना हैं, उनका आदर्श ही हमारा मार्गदर्शक: स्वामी अवधेशानंद गिरि


हरिद्वार। विश्वविख्यात भारत माता मन्दिर के संस्थापक, निवृत्त जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज का सप्तम समाधि दिवस (पुण्यतिथि) गुरूवार को भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट एवं भारत माता जनहित ट्रस्ट के तत्वावधान में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े उनके कोटि-कोटि श्रद्धालुओं ने गुरुदेव की चिन्मय आत्मसत्ता को भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर पूज्य जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि पूज्यपाद गुरुदेव का सम्पूर्ण जीवन भारतीय अध्यात्म की गौरवशाली परम्परा का एक अद्वितीय स्वर्णिम अध्याय है। वे सनातन संस्कृति की सार्वभौम चेतना के सजीव प्रतिनिधि थे, जिनके भीतर भगवान आदि शंकराचार्य की अद्वैत दृष्टि, वेदों का प्रकाश और भारत की सांस्कृतिक आत्मा एकाकार होकर प्रकट हुई थी। गुरुदेव भगवान का ब्रह्मलीन होना केवल स्थूल देह का अवसान है, गुरु कभी विलुप्त नहीं होते, वे तो शाश्वत चेतना हैं जो अपने उपदेश, तप और अनुग्रह से युगों-युगों तक साधकों का मार्ग आलोकित करते हैं। उनकी सच्ची उपासना केवल पुष्पांजलि में नहीं, बल्कि उनके द्वारा प्रदर्शित सत्य, सेवा, साधना, समन्वय और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने में है।

समाधि मंदिर पर विशेष अभिषेक एवं रजत छत्र अर्पण

हरिद्वार। समाधि दिवस के अवसर पर आज प्रातःकाल से ही समाधि मंदिर परिसर, राघव कुटीर हरिपुर कलां में गहरा आध्यात्मिक वातावरण रहा। यहाँ मुख्य विग्रह का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन-अर्चन, रुद्राभिषेक और महाआरती संपन्न हुई। पूज्य गुरुदेव के प्रति अगाध श्रद्धा निवेदित करते हुए आगर-मालवा (मध्य प्रदेश) से पधारे श्रद्धालु श्री दिलीप सोनी जी एवं श्रीमती अर्चना जी द्वारा समाधि पीठ पर एक भव्य और कलात्मक चाँदी का छत्र (रजत छत्र) अर्पित किया गया।

सेवा प्रकल्पों को बढ़ाने का संकल्प

इस पावन अवसर पर भारत माता जनहित ट्रस्ट के बोर्ड की एक विशेष बैठक भी संपन्न हुई, जिसमें पूज्य स्वामी जी महाराज के राष्ट्रसेवा और लोकमंगल के प्रकल्पों को और अधिक सुदृढ़ता से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। साथ ही, पूज्य गुरुदेव के श्रीसमाधि-मन्दिर की सेवा, संरक्षण, सौन्दर्य-विस्तार तथा भावी विकास-परियोजनाओं के सम्बन्ध में गंभीर विचार-विमर्श भी सम्पन्न हुआ। बैठक में मुख्य रूप से ट्रस्ट के महासचिव आई.डी. शास्त्री तथा सम्मानित न्यासीगण भूपेन्द्र कौशिक, अजय सूद, सुरेश मोढ़ एवं विजेंद्र वाजपेई उपस्थित रहे।

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर पूज्य महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी ललितानन्द गिरि महाराज, रश्मिता चतुर्वेदी, नवीन शर्मा सहित विशाल संत मंडली एवं साधक समूह की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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