पहाड़ों से सितारों तक: रमेश भद्री ने विज्ञान नवाचार और स्वरोजगार से लिखी सफलता की प्रेरक कहानी

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / बेनीराम उनियाल,
टिहरी। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की शांत वादियों से निकलकर खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले रमेश भद्री आज विज्ञान, नवाचार और स्वरोजगार के क्षेत्र में प्रेरणादायी उदाहरण बन चुके हैं।
सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जुनून और निरंतर अध्ययन के बल पर उन्होंने खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफोटोग्राफी और इमेज प्रोसेसिंग में दक्षता हासिल की। बचपन से ही तारों और आकाशगंगाओं के प्रति उनकी जिज्ञासा ने उन्हें ब्रह्मांड को समझने की दिशा में आगे बढ़ाया।
उन्होंने प्रतापनगर क्षेत्र में ’’टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी’’ की स्थापना की, जो आज विज्ञान शिक्षा, अनुसंधान और एस्ट्रो-टूरिज्म का उभरता केंद्र बन चुका है। यहां नियमित स्टारगेज़िंग सत्र, विज्ञान कार्यशालाएं और शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किए जाते हैं, जिससे छात्र और पर्यटक खगोलीय दुनिया को करीब से देख पा रहे हैं।
जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा दे रही है। अपर जिलाधिकारी ने भी इसे पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया।
रमेश भद्री का लक्ष्य इस वेधशाला को राष्ट्रीय स्तर के खगोल विज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक युवा विज्ञान और नवाचार से जुड़ सकें।
सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जुनून और निरंतर अध्ययन के बल पर उन्होंने खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफोटोग्राफी और इमेज प्रोसेसिंग में दक्षता हासिल की। बचपन से ही तारों और आकाशगंगाओं के प्रति उनकी जिज्ञासा ने उन्हें ब्रह्मांड को समझने की दिशा में आगे बढ़ाया।
उन्होंने प्रतापनगर क्षेत्र में ’’टिहरी स्काईज़ ऑब्जर्वेटरी’’ की स्थापना की, जो आज विज्ञान शिक्षा, अनुसंधान और एस्ट्रो-टूरिज्म का उभरता केंद्र बन चुका है। यहां नियमित स्टारगेज़िंग सत्र, विज्ञान कार्यशालाएं और शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किए जाते हैं, जिससे छात्र और पर्यटक खगोलीय दुनिया को करीब से देख पा रहे हैं।
जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा दे रही है। अपर जिलाधिकारी ने भी इसे पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया।
रमेश भद्री का लक्ष्य इस वेधशाला को राष्ट्रीय स्तर के खगोल विज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि अधिक से अधिक युवा विज्ञान और नवाचार से जुड़ सकें।
