नशे की सप्लाई चेन तोड़ने और जागरूकता अभियान को जन-आंदोलन बनाने पर डीएम का जोर

सुमित तिवारी / उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने, सप्लाई चेन तोड़ने तथा युवाओं को नशे से बचाने के लिए सभी विभागों को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
डीएम ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अभियान से जोड़ते हुए बड़े स्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों और नशा तस्करों की जीआईएस मैपिंग करने, मेडिकल स्टोरों व दवा फैक्ट्रियों का नियमित निरीक्षण करने तथा सभी मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाने को कहा।
उन्होंने विद्यालयों और कॉलेजों के आसपास निगरानी बढ़ाने, एंटी ड्रग्स कमेटियों को सक्रिय करने तथा मानस हेल्पलाइन 1933 और एनसीओआरडी पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि नशा समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए गंभीर चुनौती है, इसलिए प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षण संस्थान और आमजन मिलकर इसे जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएं।
बैठक में एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को संयुक्त अभियान चलाने तथा आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया गया।
डीएम ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अभियान से जोड़ते हुए बड़े स्तर पर ड्रग्स टेस्टिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों और नशा तस्करों की जीआईएस मैपिंग करने, मेडिकल स्टोरों व दवा फैक्ट्रियों का नियमित निरीक्षण करने तथा सभी मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाने को कहा।
उन्होंने विद्यालयों और कॉलेजों के आसपास निगरानी बढ़ाने, एंटी ड्रग्स कमेटियों को सक्रिय करने तथा मानस हेल्पलाइन 1933 और एनसीओआरडी पोर्टल का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि नशा समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए गंभीर चुनौती है, इसलिए प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षण संस्थान और आमजन मिलकर इसे जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएं।
बैठक में एएनटीएफ, एसटीएफ, पुलिस, एनसीबी और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को संयुक्त अभियान चलाने तथा आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया गया।
