रानीखेत की को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री के फिर बहुरेंगे दिन, आयुर्वेदिक उत्पादन से मिलेगा रोजगार: डॉ. धन सिंह

देहरादून। उत्तराखंड में सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) ने लंबे समय से बंद पड़ी रानीखेत स्थित को-ऑपरेटिव ड्रग फैक्ट्री (सीडीएफ) और हल्दूचौड़ स्थित उत्तराखंड स्टेट मेडिसिन एंड पैरामेडिकल्स लिमिटेड (यूएमपीएल) को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि दोनों इकाइयों को आधुनिक मशीनरी, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और उन्नत उत्पादन प्रणाली से सुसज्जित कर आयुर्वेदिक औषधियों का उत्पादन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को रोजगार और आर्थिक विकास का मजबूत आधार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से वर्षों से निष्क्रिय पड़ी इन इकाइयों के पुनरुद्धार की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। दोनों संस्थानों में चूर्ण, वटी, रस, भस्म, तैल, आसव-अरिष्ट, गुग्गुल तथा पाक-अवलेह जैसी पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया जाएगा। महाशंख वटी, आरोग्यवर्धिनी वटी, त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, अर्जुनारिष्ट, दशमूलारिष्ट, महानारायण तैल और अभ्रक भस्म जैसे उत्पाद प्रमुख रूप से तैयार किए जाएंगे।
डॉ. रावत ने बताया कि दोनों इकाइयों के पूर्ण संचालन से 200 से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले 500 से 1000 किसान भी इससे सीधे लाभान्वित होंगे। कच्चे माल की आपूर्ति, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन जैसी गतिविधियों से हजारों लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि इन इकाइयों के पूर्ण क्षमता से संचालन के बाद लगभग 100 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार का लक्ष्य रखा गया है, जिससे 10 से 15 करोड़ रुपये तक वार्षिक लाभ की संभावना है। राज्य की समृद्ध औषधीय वनस्पति संपदा का उपयोग करते हुए यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डॉ. रावत ने कहा कि सीडीएफ और यूएमपीएल का पुनर्संचालन सहकारिता आधारित औद्योगिक विकास का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा तथा आयुर्वेद, किसान कल्याण और रोजगार सृजन को नई दिशा देगा।
