
बागेश्वर जनपद के दूरस्थ गांव नामती चेटाबगड़ की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति और संवैधानिक पदों तक पहुंचने वाले भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा की मिसाल माना जाता है। सीमित संसाधनों और पहाड़ की कठिन परिस्थितियों के बीच पले-बढ़े कोश्यारी ने अपने संकल्प, परिश्रम और जनसमर्पण के बल पर देशभर में विशेष पहचान बनाई।
छात्र जीवन से ही सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रहित के मुद्दों से जुड़े रहे कोश्यारी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलग राज्य की मांग को लेकर चले जनआंदोलन में वे पहाड़ की मजबूत आवाज बनकर उभरे। राज्य गठन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में सड़क, शिक्षा, रोजगार और पर्वतीय विकास जैसे विषयों को प्राथमिकता दी। उनका सरल स्वभाव और जनता से सीधा संवाद उन्हें जननेता के रूप में अलग पहचान दिलाता रहा।
बाद में महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने सक्रिय और सादगीपूर्ण कार्यशैली से लोगों का विश्वास जीता। संवैधानिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों से लगातार जुड़े रहे।
“पद्म भूषण” सम्मान मिलने के बाद उत्तराखंड, विशेषकर बागेश्वर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने मिठाइयां बांटकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और इसे पूरे पहाड़ की संस्कृति, संघर्ष और मेहनतकश समाज का सम्मान बताया। युवाओं ने इसे प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भगत सिंह कोश्यारी को शुभकामनाएं देते हुए उनके जीवन को सेवा, संघर्ष और समर्पण की मिसाल बताया। नामती चेटाबगड़ की मिट्टी से निकला यह व्यक्तित्व आज पूरे उत्तराखंड के गौरव का प्रतीक बन चुका है।
