वसुधैव कुटुंम्बकम फाउंडेशन के निरंतर चल रहे सेवा के प्रकल्प

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / जोगेंद्र मावी,
हरिद्वार। वसुधैव कुटुंम्बकम् फाउंडेशन (रजि.) ने चंडीघाट, दिव्य प्रेम सेवा मिशन के पीछे स्थित आंगन में पाठ्य सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया।
हरिद्वार जनपद का चंडी घाट क्षेत्र गंगा के किनारे बसा एक ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार और दैनिक मजदूरी पर निर्भर लोग रहते हैं। यहां के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सीमित है। सरकारी विद्यालयों की दूरी, आर्थिक तंगी और शैक्षणिक सामग्री की अनुपलब्धता के कारण कई बच्चे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।
इसी कमी को दूर करने के लिए फाउंडेशन ने स्थानीय सर्वे के बाद जरूरतमंद बच्चों की पहचान की। चंडी घाट क्षेत्र में आर्थिक तंगी के कारण कई अभिभावक बच्चों के लिए स्टेशनरी का खर्च नहीं उठा पाते। समुदाय की भागीदारी और सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में कक्षा 1 से 8 तक के 32 बच्चों को कॉपी, किताबें, पेन, पेंसिल और ज्योमेट्री बॉक्स वितरित किए गए। शिक्षा से जुड़ी रेखा अपने बचे हुए समय में शाम के समय घर के आंगन में कुछ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रही हैं।
एक अभिभावक ने कहा, “हम मजदूरी करते हैं, महीने का खर्च मुश्किल से निकलता है। बच्चों की किताबें खरीदना हमारे लिए बहुत भारी पड़ता है। आज फाउंडेशन ने हमारे सिर से बड़ा बोझ उतार दिया।”
फाउंडेशन की अध्यक्ष रेनू अरोड़ा ने कहा कि “शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है, और हमारा कर्तव्य है कि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण इस अधिकार से वंचित न रहे। चंडी घाट जैसे क्षेत्रों में काम करना आसान नहीं है, क्योंकि यहां की चुनौतियां अलग हैं। फाउंडेशन कोषाध्यक्ष विनीता सिकोरिया, सदस्य रुचि तनेजा, सदस्य सोनिया भाटिया ने कहा कि, “बच्चों के चेहरे पर खुशी देखकर लगता है कि समाज सेवा का इससे बड़ा पुरस्कार और क्या हो सकता है। हमें उम्मीद है कि ये बच्चे आगे चलकर अपने परिवार और समाज का नाम रोशन करेंगे।” वसुधैव कुटुंम्बकम् फाउंडेशन ने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा के लिए बड़े संसाधन नहीं, बड़ा मन चाहिए। बच्चों के हाथों में नई कॉपियां हैं, और उनकी आंखों में नए सपने हैं – यही किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी है।
हरिद्वार जनपद का चंडी घाट क्षेत्र गंगा के किनारे बसा एक ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार और दैनिक मजदूरी पर निर्भर लोग रहते हैं। यहां के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सीमित है। सरकारी विद्यालयों की दूरी, आर्थिक तंगी और शैक्षणिक सामग्री की अनुपलब्धता के कारण कई बच्चे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।
इसी कमी को दूर करने के लिए फाउंडेशन ने स्थानीय सर्वे के बाद जरूरतमंद बच्चों की पहचान की। चंडी घाट क्षेत्र में आर्थिक तंगी के कारण कई अभिभावक बच्चों के लिए स्टेशनरी का खर्च नहीं उठा पाते। समुदाय की भागीदारी और सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में कक्षा 1 से 8 तक के 32 बच्चों को कॉपी, किताबें, पेन, पेंसिल और ज्योमेट्री बॉक्स वितरित किए गए। शिक्षा से जुड़ी रेखा अपने बचे हुए समय में शाम के समय घर के आंगन में कुछ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रही हैं।
एक अभिभावक ने कहा, “हम मजदूरी करते हैं, महीने का खर्च मुश्किल से निकलता है। बच्चों की किताबें खरीदना हमारे लिए बहुत भारी पड़ता है। आज फाउंडेशन ने हमारे सिर से बड़ा बोझ उतार दिया।”
फाउंडेशन की अध्यक्ष रेनू अरोड़ा ने कहा कि “शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है, और हमारा कर्तव्य है कि कोई भी बच्चा संसाधनों की कमी के कारण इस अधिकार से वंचित न रहे। चंडी घाट जैसे क्षेत्रों में काम करना आसान नहीं है, क्योंकि यहां की चुनौतियां अलग हैं। फाउंडेशन कोषाध्यक्ष विनीता सिकोरिया, सदस्य रुचि तनेजा, सदस्य सोनिया भाटिया ने कहा कि, “बच्चों के चेहरे पर खुशी देखकर लगता है कि समाज सेवा का इससे बड़ा पुरस्कार और क्या हो सकता है। हमें उम्मीद है कि ये बच्चे आगे चलकर अपने परिवार और समाज का नाम रोशन करेंगे।” वसुधैव कुटुंम्बकम् फाउंडेशन ने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा के लिए बड़े संसाधन नहीं, बड़ा मन चाहिए। बच्चों के हाथों में नई कॉपियां हैं, और उनकी आंखों में नए सपने हैं – यही किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी है।
