इतना दबंग बना कि हर किसी को देता था गाली
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / जोगेंद्र मावी,
एटीएस कॉलोनी में लंबे समय से आतंक फैलाकर दहशत और विवादों का कारण बने बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुनीत अग्रवाल के खिलाफ गुंडा एक्ट लगाते हुए छह माह के लिए देहरादून जनपद से जिला बदर करने के आदेश जारी कर दिया। बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में उसका शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त कर दिया। प्रशासन ने आरोपित की 32 बोर पिस्टल जब्त करते हुए पुलिस अभिरक्षा में रखने के आदेश भी जारी किए हैं।
मामले की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को एटीएस कॉलोनी निवासी एवं डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा समेत अन्य लोगों की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 13 अप्रैल को पुनीत अग्रवाल ने डीआरडीओ में कार्यरत वरिष्ठ वैज्ञानिक के परिवार पर हमला किया। मारपीट में पीड़ित का कान का पर्दा फट गया, जबकि महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्रता और गाली-गलौच भी की गई।
मामला जिला मजिस्ट्रेट के पहुंचा, जिसकी गंभीरता को देखते हुए डीएम ने एसडीएम मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच में सामने आया कि आरोपी का व्यवहार लगातार क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा कर रहा था। थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, वायरल वीडियो क्लिप्स और स्थानीय निवासियों की शिकायतों को भी कोर्ट ने गंभीरता से लिया। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका ने भी कार्रवाई की मांग की थी।
बिना अनुमति देहरादून जिले प्रवेश नहीं
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी की गतिविधियां जनसुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं। वहीं बचाव पक्ष ने मामले को आपसी रंजिश और सिविल विवाद बताया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों, दर्ज मुकदमों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने पुनीत अग्रवाल को अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति माना।
आदेश के अनुसार पुनीत अग्रवाल अगले छह माह तक बिना अनुमति देहरादून जिले में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। रायपुर थाना पुलिस को आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद से बाहर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले भी दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में डीएम ने उसका शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया था। आरोपी के खिलाफ मारपीट, धमकी, गाली-गलौच और उत्पीड़न समेत विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं।
मामले की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को एटीएस कॉलोनी निवासी एवं डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा समेत अन्य लोगों की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 13 अप्रैल को पुनीत अग्रवाल ने डीआरडीओ में कार्यरत वरिष्ठ वैज्ञानिक के परिवार पर हमला किया। मारपीट में पीड़ित का कान का पर्दा फट गया, जबकि महिलाओं और बुजुर्गों के साथ अभद्रता और गाली-गलौच भी की गई।
मामला जिला मजिस्ट्रेट के पहुंचा, जिसकी गंभीरता को देखते हुए डीएम ने एसडीएम मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच में सामने आया कि आरोपी का व्यवहार लगातार क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा कर रहा था। थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, वायरल वीडियो क्लिप्स और स्थानीय निवासियों की शिकायतों को भी कोर्ट ने गंभीरता से लिया। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका ने भी कार्रवाई की मांग की थी।
बिना अनुमति देहरादून जिले प्रवेश नहीं
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी की गतिविधियां जनसुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं। वहीं बचाव पक्ष ने मामले को आपसी रंजिश और सिविल विवाद बताया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों, दर्ज मुकदमों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने पुनीत अग्रवाल को अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति माना।
आदेश के अनुसार पुनीत अग्रवाल अगले छह माह तक बिना अनुमति देहरादून जिले में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। रायपुर थाना पुलिस को आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद से बाहर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले भी दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में डीएम ने उसका शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया था। आरोपी के खिलाफ मारपीट, धमकी, गाली-गलौच और उत्पीड़न समेत विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं।
