‘बोलो, बताओ, बचाओ’ के संदेश के साथ बच्चों को सुरक्षा, संरक्षण और उनके अधिकारों के प्रति किया जागरूक
विकास गर्ग / उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जनपद हरिद्वार में 26 से 31 अक्टूबर तक संचालित ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का समापन डिवाइन लाइट पब्लिक स्कूल, जगजीतपुर में किया गया। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के अंतर्गत आयोजित इस व्यापक जनजागरूकता अभियान की थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार, हर बच्चे का बचपन हम सबकी जिम्मेदारी’ रही। सप्ताहभर चले इस अभियान के अंतर्गत जनपद के 250 से अधिक शासकीय, अशासकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों के एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर बाल सुरक्षा एवं संरक्षण के प्रति जागरूकता प्राप्त की।
समापन कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज नरेंद्र दत्त ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक बच्चा अपने अधिकारों और कानून के प्रति जागरूक होगा तथा बिना भय और झिझक के अपनी बात कहने में सक्षम बनेगा। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि किसी भी गलत व्यवहार को सहन न करें और न ही ऐसी घटना को छिपाएं।
उन्होंने सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि विद्यालय परिसर अथवा आसपास कोई भी व्यक्ति अनुचित व्यवहार करता है, तो इसकी जानकारी तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद वयस्क को दें। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बाल अपराधों की रोकथाम और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस प्रकार के जागरूकता अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम के दौरान ‘बोलो, बताओ, बचाओ’ संदेश के माध्यम से छात्र-छात्राओं को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, भरोसेमंद वयस्कों की पहचान, अनुचित व्यवहार की स्थिति में सहायता प्राप्त करने तथा अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव न्यायिक अधिकारी सिमरनजीत कौर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों एवं अभिभावकों का अधिक संवेदनशील और जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसा सुरक्षित और विश्वासपूर्ण वातावरण मिलना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी डर के अपनी समस्या साझा कर सकें। अभियान के माध्यम से किसी भी घटना के खुलासे, रिपोर्टिंग और सहायता तंत्र के प्रति भी जागरूक किया गया।
समाजसेविका एवं बाल कल्याण समिति की सदस्य सुनीता चौधरी ने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी अप्रिय घटना अथवा समस्या की स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) तथा पुलिस की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और सहयोग प्राप्त करने का अधिकार है तथा बाल संरक्षण के लिए समाज को सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
कार्यक्रम में विजेंद्र पालीवाल तथा हाईकोर्ट के अधिवक्ता ललित कुमार ने भी बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने तथा बाल सुरक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का संदेश दिया गया।
समापन कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला जज नरेंद्र दत्त ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ तभी सार्थक होगा, जब प्रत्येक बच्चा अपने अधिकारों और कानून के प्रति जागरूक होगा तथा बिना भय और झिझक के अपनी बात कहने में सक्षम बनेगा। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि किसी भी गलत व्यवहार को सहन न करें और न ही ऐसी घटना को छिपाएं।
उन्होंने सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि विद्यालय परिसर अथवा आसपास कोई भी व्यक्ति अनुचित व्यवहार करता है, तो इसकी जानकारी तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद वयस्क को दें। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बाल अपराधों की रोकथाम और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस प्रकार के जागरूकता अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम के दौरान ‘बोलो, बताओ, बचाओ’ संदेश के माध्यम से छात्र-छात्राओं को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, भरोसेमंद वयस्कों की पहचान, अनुचित व्यवहार की स्थिति में सहायता प्राप्त करने तथा अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव न्यायिक अधिकारी सिमरनजीत कौर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों एवं अभिभावकों का अधिक संवेदनशील और जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसा सुरक्षित और विश्वासपूर्ण वातावरण मिलना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी डर के अपनी समस्या साझा कर सकें। अभियान के माध्यम से किसी भी घटना के खुलासे, रिपोर्टिंग और सहायता तंत्र के प्रति भी जागरूक किया गया।
समाजसेविका एवं बाल कल्याण समिति की सदस्य सुनीता चौधरी ने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी अप्रिय घटना अथवा समस्या की स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) तथा पुलिस की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और सहयोग प्राप्त करने का अधिकार है तथा बाल संरक्षण के लिए समाज को सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
कार्यक्रम में विजेंद्र पालीवाल तथा हाईकोर्ट के अधिवक्ता ललित कुमार ने भी बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने तथा बाल सुरक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का संदेश दिया गया।
