खड़िया खनन का विवाद गहराया, सातवें दिन भी धरने पर डटे पट्टाधारक

बागेश्वर। भैरूचौबट्टा में खड़िया खदान का संचालन बंद होने के विरोध में खनन पट्टाधारक नवीन कुमार, रितु बसंत, उनके अधिवक्ता बसंत कुमार और प्रभावित ग्रामीणों का जिलाधिकारी कार्यालय के समीप धरना सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने न्यायालयों के आदेशों और शासनादेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खनन बंद रहने से मजदूरों, व्यापारियों, वाहन संचालकों और स्थानीय परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
जिले की 29 बंद खड़िया खदानों का मामला भी चर्चा में है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने प्रशासन से खनन पट्टों के संचालन में आ रही बाधाओं और रोजगार पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने शासनादेश संख्या 2902/वीआईआई-ए-1/2025-09 (83)/2025, दिनांक 18 नवंबर 2025 के अनुपालन तथा खान अधिनियम, 1952 की धारा 5(1) के तहत जारी अधिसूचना सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई।
खनन पर रोक के आधार पर मांगा जवाब
धरने पर बैठे अधिवक्ता बसंत कुमार ने आरोप लगाया कि प्रशासन खनन कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने मांग की कि खनन रोकने के लिए लागू अधिनियम, संबंधित धाराओं और कानूनी आधार की जानकारी सार्वजनिक की जाए। आंदोलनकारियों के अनुसार, खड़िया खनन से जुड़े मामले में नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद रोक लगी थी। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से 29 खनन पट्टाधारकों को राहत मिलने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, राहत का वास्तविक दायरा और संबंधित खदानों पर लागू शर्तों की पुष्टि आधिकारिक न्यायालयीन आदेशों से किया जाना आवश्यक है।
राजनीतिक दलों ने दिया समर्थन
धरने को पूर्व दर्जा राज्यमंत्री राजेन्द्र सिंह टगड़िया, ओबीसी विभाग के जिलाध्यक्ष ललित गिरी गोस्वामी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन भट्ट और हरीश ऐठानी सहित अन्य नेताओं का समर्थन मिला। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक प्रशासन लिखित रूप में कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता और संबंधित आदेशों के अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक नहीं करता, तब तक शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा। उन्होंने प्रभावित परिवारों की आजीविका से जुड़े सवालों का समाधान निकालने की भी मांग की।
