ग्राम प्रधानों ने उठाई विशेष विकास पैकेज की मांग

कृष्णा नैनवाल
हल्द्वानी। उत्तराखंड के गांवों की तस्वीर बदलने और लगातार बढ़ते पलायन पर अंकुश लगाने के लिए ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करना जरूरी है। गांवों में सड़क, पेयजल, रास्ते, नालियां, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं होने से पंचायतों के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में ग्राम प्रधानों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सरकार से पंचायतों को विशेष विकास निधि उपलब्ध कराने तथा पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है।
ग्राम पंचायतों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहली सीढ़ी माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का सीधा संबंध पंचायतों से है, लेकिन पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के अभाव में ग्राम प्रधानों को विकास कार्यों के लिए विभिन्न विभागों और अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ग्रामीणों को आज भी कई स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि गांवों के सर्वांगीण विकास और पलायन रोकने के लिए पंचायतों को पर्याप्त आर्थिक अधिकार और संसाधन कब मिलेंगे?
ग्राम पंचायतों को मिले विशेष विकास निधि: पूनम जागी
नया गांव कटान की ग्राम प्रधान पूनम जागी का कहना है कि ग्राम पंचायतों को विकास निधि उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि गांवों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य कराए जा सकें। पंचायतों को पर्याप्त धनराशि मिलेगी तो गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने में मदद मिलेगी। सरकार को पंचायतों की जरूरतों को समझते हुए उन्हें विशेष विकास पैकेज देने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।
अधिकारियों के चक्कर काटते हैं ग्राम प्रधान: कमलेश दुर्गपाल
पूर्व ग्राम प्रधान कमलेश दुर्गपाल ने कहा कि ग्राम पंचायतों के पास आय के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसी स्थिति में ग्राम प्रधानों को अपने गांव के विकास कार्यों के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। पंचायतों की जिम्मेदारियां तो लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाते। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में गांवों का विकास चाहती है, तो ग्राम पंचायतों को पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम करना होगा।
पंचायती राज एक्ट में संशोधन जरूरी: रमेश पाण्डेय
वरिष्ठ पत्रकार रमेश पाण्डेय कृषक का कहना है कि पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए केवल विकास निधि उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पंचायती राज एक्ट में आवश्यक संशोधन करना भी जरूरी है। पंचायतों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप अधिकार और वित्तीय संसाधन मिलने चाहिए, ताकि ग्राम प्रधान स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से कर सकें। उनका मानना है कि पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें विकास कार्यों के लिए उन्हें बार-बार दूसरे स्तरों पर निर्भर न रहना पड़े। अधिकार, संसाधन और जवाबदेही के बीच उचित संतुलन स्थापित करके ही ग्रामीण विकास को गति दी जा सकती है।
धन के अभाव में प्रभावित हो रहे गांवों के विकास कार्य
सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र जागी ने कहा कि ग्राम पंचायतों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्रथम सीढ़ी की सरकार कहा जाता है, लेकिन विकास कार्यों के लिए धन का अभाव होने से गांवों का विकास प्रभावित हो रहा है। सरकार एक ओर गांवों के विकास और ग्रामीण सुविधाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। जब तक ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक गांवों में विकास कार्यों को अपेक्षित गति देना मुश्किल होगा।
पलायन रोकने के लिए गांवों को बनाना होगा आत्मनिर्भर
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन एक गंभीर चुनौती है। रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों का शहरों की ओर रुख करना गांवों की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में ग्राम पंचायतों को विशेष विकास निधि उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि, बागवानी, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय स्वरोजगार को बढ़ावा देने की जरूरत है। वहीं, ग्रामीण रोजगार योजनाओं में मजदूरों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के दौरान नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। सरकार को ऐसे गांवों के लिए व्यावहारिक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि तकनीकी बाधाओं के कारण ग्रामीण मजदूरों को परेशानी न हो।
