कांग्रेस-यूकेडी का प्रदर्शन, पुलिस ने वाटर कैनन का किया इस्तेमाल

सुमित तिवारी / उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
देहरादून/भराड़ीसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के पहले दिन गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा देने सहित विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुआ।
उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी), कांग्रेस, प्रदेश प्रधान संगठन और सुराज सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए विधानसभा की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी, लेकिन आंदोलनकारी सुरक्षा घेरों को पार कर दिवालीखाल तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा देना, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना और जर्जर सड़कों की स्थिति सुधारना शामिल रहा। विधानसभा सत्र के पहले दिन विभिन्न संगठनों के जुटने से क्षेत्र में सुबह से ही हलचल बनी रही। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था की थी।
उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी), कांग्रेस, प्रदेश प्रधान संगठन और सुराज सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए विधानसभा की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की थी, लेकिन आंदोलनकारी सुरक्षा घेरों को पार कर दिवालीखाल तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा देना, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना और जर्जर सड़कों की स्थिति सुधारना शामिल रहा। विधानसभा सत्र के पहले दिन विभिन्न संगठनों के जुटने से क्षेत्र में सुबह से ही हलचल बनी रही। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था की थी।

पांडुवाखाल और मेहलचौरी में पुलिस से झड़प
कुमाऊं क्षेत्र की ओर से आ रहे कांग्रेस, यूकेडी और प्रदेश प्रधान संगठन के कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पांडुवाखाल और मेहलचौरी बैरियर पर पुलिस तैनात रही। सुबह करीब आठ बजे से ही दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इसी दौरान यूकेडी कार्यकर्ताओं ने मेहलचौरी पुल पर लगा लोहे का गेट उखाड़कर रामगंगा नदी में फेंक दिया। कालीमाटी बैरियर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, गणेश गोदियाल और मुकेश नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। काफी देर तक रास्ता नहीं खुलने पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जंगल के पथरीले रास्तों से होते हुए दिवालीखाल पहुंचने का प्रयास किया। दूसरी ओर, आशीष नेगी के नेतृत्व में पहुंचे यूकेडी कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ते रहे।

दिवालीखाल में बैरियर तोड़ने का प्रयास
दोपहर करीब एक बजे दिवालीखाल में कांग्रेस, यूकेडी, प्रधान संगठन और सुराज सेवा दल के कार्यकर्ता एकत्र हुए। यहां विधानसभा की ओर जाने वाले रास्ते पर चार स्तरों में सुरक्षा बैरियर लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरियर पार करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया। इस दौरान लोहे के गेट और बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचने की भी सूचना सामने आई। विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार से कुछ दूरी पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। यूकेडी कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान की स्थिति बनी रही।

मुख्य द्वार पर आमना-सामना, प्रदर्शनकारी हिरासत में
यूकेडी के कई कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा पार कर विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंच गए। यहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए विधानसभा परिसर में प्रवेश की मांग की। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिससे करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्हें पुलिस वाहनों से अस्थायी जेल मालसी भेजा गया। विधानसभा सत्र के पहले दिन हुए इस प्रदर्शन ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने और क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को लेकर राजनीतिक संगठनों के विरोध को फिर चर्चा में ला दिया।
घायल प्रदर्शनकारियों की मदद को आगे आई पुलिस
देहरादून/भराड़ीसैंण। विधानसभा सत्र के दौरान भराड़ीसैंण में प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग से टकराने के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ-पैरों में चोटें आ गईं। ऐसे में ड्यूटी पर तैनात पुलिस जवानों ने तत्काल उनकी मदद की और घायलों के हाथ-पैरों पर पट्टियां बांधकर राहत पहुंचाई। एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर पुलिस जवान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। इसके बावजूद घायल लोगों की मदद के लिए पुलिसकर्मी आगे आए। इस घटना ने दिखाया कि विरोध और विचारों में मतभेद के बावजूद मानवीय संवेदनाएं सर्वाेपरि हैं। पुलिस जवानों की इस पहल ने संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ जरूरत के समय लोगों की सहायता करना भी मानवीय कर्तव्य है।
