विश्व पर्यावरण दिवस : प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प है : सुमित तिवारी
विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 1972 में हुई : विकास गर्ग
हरिद्वार। श्री राम नाम विश्व बैंक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुमित तिवारी ने कहा कि हर साल 5 जून को दुनिया भर में *”विश्व पर्यावरण दिवस” (World Environment Day)* मनाया जाता है। यह दिन केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि हमारी धरती को बचाने, पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रकृति के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कदम उठाने का एक वैश्विक संकल्प है। आधुनिकता और विकास की अंधी दौड़ में हम जिस तेजी से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं, उसने आज मानव अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ऐसे में यह दिवस हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के बिना हमारा कोई वजूद नहीं है।
श्री राम नाम विश्व बैंक समिति के महासचिव विकास गर्ग ने बताया कि इस दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा *वर्ष 1972* में मानव पर्यावरण पर आयोजित स्टॉकहोम सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद, *5 जून 1974* को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। तब से लेकर आज तक, हर साल इस दिन को एक विशेष थीम (विषय) के साथ मनाया जाता है, जो वैश्विक स्तर पर पर्यावरण की किसी गंभीर समस्या की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करती है।
श्री राम नाम विश्व बैंक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुमित तिवारी ने बताया कि पर्यावरण के समक्ष वर्तमान में कई चुनौतियाँ है। उन्होंने कहा कि आज हमारी पृथ्वी कई गंभीर संकटों से जूझ रही है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन: ग्रीनहाउस गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और मौसम का चक्र बिगड़ रहा है।
प्रदूषण की मार: वायु, जल और मृदा (मिट्टी) प्रदूषण ने इंसानों के साथ-साथ मूक पशु-पक्षियों का जीना भी दूभर कर दिया है। प्लास्टिक कचरा आज महासागरों और जमीन को बंजर बना रहा है।
वनों की कटाई (Deforestation): कंक्रीट के जंगल बनाने के लिए प्राकृतिक जंगलों को बेरहमी से काटा जा रहा है, जिससे जैव विविधता (Biodiversity) नष्ट हो रही है और वन्यजीवों के आशियाने छिन रहे हैं।
श्री राम नाम विश्व बैंक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुमित तिवारी ने यह भी बताया कि हमारा कर्तव्य: छोटे कदमों से बड़ा बदलाव करना है। पर्यावरण संरक्षण का जिम्मा केवल सरकारों या संगठनों का नहीं है। बल्कि हमें एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करके बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।
1. पौधारोपण करें: अपने जीवन के विशेष अवसरों (जैसे जन्मदिन, त्योहार) पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसकी देखभाल करें।
2. सिंगल-यूज प्लास्टिक को कहें ‘ना’ : प्लास्टिक की थैलियों और बोतलों की जगह कपड़े के थैलों और स्टील या कांच के बर्तनों का उपयोग करें।
3. जल और ऊर्जा का संरक्षण: पानी की हर बूंद कीमती है, इसे व्यर्थ न बहाएं। जरूरत न होने पर बिजली के उपकरण, पंखे और लाइट बंद रखें।
4. सस्टेनेबल लाइफस्टाइल अपनाएं: कचरे का सही निपटान करें (गीला और सूखा कचरा अलग रखें) और रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) को बढ़ावा दें।
सुमित तिवारी ने सभी से अपील करते हुए कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कैसा भविष्य देकर जा रहे हैं ? एक स्वच्छ और हरा-भरा ग्रह या प्रदूषण से घुटती हुई धरती ? समय आ गया है कि हम केवल बातें करना बंद करें और धरातल पर काम शुरू करें। आइए, इस पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर यह प्रतिज्ञा लें कि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे, उसका दोहन नहीं, बल्कि पोषण करेंगे।
इस अवसर पर मुकेश शर्मा, कुलदीप राय, राजकुमार, संतोष नैनवाल, दक्ष पंवार, बदल गोस्वामी, इशिका धीमान, बाबा केशनाथ, मधुर कुमार, वेदांत चौहान, साहिल शर्मा, शैली, अमिता आदि लोग उपस्थित रहे।

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