​ढलीपुर में नियमों को ताक पर रख धड़ल्ले से चल रहा अवैध भंडारण; विदेशी मेहमानों (प्रवासी पक्षियों) के आशियाने पर हथौड़ा

​विकासनगर/ढालीपुर। उत्तराखंड सरकार भले ही प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ और अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन विकासनगर के ढालीपुर क्षेत्र में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ खनन माफिया नियम और कानून को अपने जूतों तले रौंदकर न केवल यमुना नदी का सीना चीर रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के ‘आसन वेटलैंड’ के अस्तित्व को भी दांव पर लगा रहे हैं। ढालीपुर क्षेत्र में इस समय अवैध खनन और आरबीएम (RBM) के विशालकाय भंडारण का नंगा नाच चल रहा है, जिसे देखकर साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ‘दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है’।

​नियमों के मुताबिक नदी के बिल्कुल मुहाने पर खनन सामग्री का भंडारण करना सख्त मना है। लेकिन ढालीपुर में पहली बार एक ऐसा अजूबा देखने को मिल रहा है जहाँ नदी किनारे ही आरबीएम का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। इस विशालकाय भंडारण की क्षमता कितनी है, इसकी अनुमति है भी या नहीं, इस पर खनन विभाग ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। आखिर कुंभकर्णी नींद में सोए खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन को यह अवैध कारोबार क्यों दिखाई नहीं दे रहा? यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

​माफियाओं की हठधर्मिता और दुस्साहस का आलम देखिए कि इस अवैध भंडारण से कुछ ही हवाई दूरी पर स्थित सरकारी स्कूल में जहाँ सैकड़ों नौनिहालों का भविष्य संवरता है, वहाँ अब दिन-रात उड़ती धूल और भारी वाहनों का शोर उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। इसके साथ ही ढालीपुर का ग्रामीण और रिहानशी इलाका इस अवैध डंपिंग यार्ड की जद में है, जिससे स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। आबादी क्षेत्र में स्थित मस्जिद के समीप हो रहे इस शोर-शराबे और प्रदूषण से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

​इस पूरे खेल का सबसे काला और चिंताजनक पहलू यह है कि यह अवैध धंधा ‘आसन कंजर्वेशन रिजर्व’ (आसन वेटलैंड) के ठीक नाक के नीचे चल रहा है। आसन वेटलैंड उत्तराखंड की पहली ‘रामसर साइट’ (अंतरराष्ट्रीय महत्व का दलदली क्षेत्र) है।

हर साल सर्दियों में साइबेरिया, मध्य एशिया और चीन से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके दुर्लभ विदेशी पक्षी (प्रवासी पक्षी) यहाँ आते हैं। ये पक्षी केवल वेटलैंड के पानी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आसपास के कई किलोमीटर के दायरे में अपना बसेरा बनाते हैं, खेतों तथा नदी तटों पर अंडे देते हैं और प्रजनन करते हैं। भारी मशीनों की गड़गड़ाहट, उड़ती धूल और अवैध मानवीय दखल के कारण इन बेजुबान विदेशी मेहमानों का आशियाना उजड़ने की कगार पर है। अगर यही हाल रहा तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की भारी किरकिरी होना तय है।

​आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है यह अवैध साम्राज्य? भारी-भरकम डंपर और मशीनें दिन-रात नियमों को रौंद रही हैं, लेकिन न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कुछ दिख रहा है और न ही खनन विभाग को। जनता अब सीधे सरकार से सवाल पूछ रही है कि क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित है? हैरानी की बात है ओवरलोड ट्रैक्टर डंपर सड़कों पर दौड़ रहे हैं मजाल है अगर आरटीओ इन वाहनों को चेक करें

​इस अवैध भंडारण और प्रकृति के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर यदि तुरंत कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो ढालीपुर की जनता और पर्यावरण प्रेमी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।वही जिले में खनन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे जिला खान अधिकारी ऐश्वर्या साह से जब इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने मीडिया का फोन रिसीव तक नहीं किया।

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