जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। ज्वालापुर विधानसभा से भाजपा ने प्रत्याशी नहीं बदला तो चुनाव में भारी मतों से हार का सामना करना पड़ सकता है। कारण विधायक के प्रति क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है। एक क्षेत्र को पाकिस्तान का हिस्सा बताने के बयान से हिन्दु और मुस्लिम समाज के लोग आहत है। जो लोग मिल जुलकर एक साथ रहते हैं, गंगा—जमुना की सभ्यता को सार्थक करते हैं, उनके लिए पाकिस्तान का हिस्सा बताते पर कोई विकास कार्य न कराने पर नाराजगी है। इसी के साथ विधायक के तमाम कारनामे भी सामने आ रहे हैं। इसी का कारण है कि कई गांवों में विधायक की नो एंट्री है।
ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक सुरेश राठौर को चुना गया। राज्य में सत्ता भी भाजपा की आई तो लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में सड़कें, सिंचाई के लिए नहरें, इलाज के लिए अस्पताल, शिक्षा के स्कूल खुलेंगे। लेकिन पूरे पांच साल में ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ। सड़कों में कमीशन खोरी इतनी हुई कि वे बनते ही टूटने लगी। सड़कें गड्डों में तब्दील हो गई। बरसाती नदियों पर रपटे तक नहीं बने। बारिश शुरू होते ही नदियों में पानी आने से गांवों का संपर्क टूट जाता है या दूरी के रास्तों से होकर आना पड़ता है। क्षेत्र में एक भी राजकीय इंटर कॉलेज या डिग्री कॉलेज तक नहीं खुला। ऐसे में शिक्षा के लिए क्षेत्रवासियों को शहर में आना जाना पड़ा या फिर गरीबों के बच्चे शिक्षा से वंचित रहने को मजबूर रहे। खासकर लड़कियों को तो उच्च शिक्षा प्राप्त करना मुश्किल हो गया।
क्षेत्रवासियों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब एक विशेष क्षेत्र को पाकिस्तानी क्षेत्र घोषित कर दिया। जबकि उस क्षेत्र में मुस्लिम समाज ही नहीं, बल्कि हिन्दु समाज के लोग भी थे। सबसे दुख भरी बात ये रही कि जिस मुस्लिम समाज ने कभी भड़काउ बात तक नहीं की या किसी धर्म समाज के खिलाफ बात की हो तो वे उस शब्द को सुन लेते।
क्षेत्रवासियों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि क्षेत्रीय विधायक ने उनके बीच पहुंचकर बात तक नहीं सुनी। उनके आवास पर बात करने के लिए पहुंचे तो उनकी समस्या को अनसुना कर दिया, सुन भी लो तो उसका समाधान तक नहीं हुआ। कई गांवों में तो विधायक की एंट्री पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया। गांव वालों का कहना है कि वे सबकुछ बर्दास्त कर लेंगे, लेकिन विधायक को गांव में आने नहीं देंगे।
अब यदि भाजपा ने ज्वालापुर विधानसभा से प्रत्याशी नहीं बदला तो भाजपा एक सीट हारकर अपना वोट प्रतिशत कम करने को तैयार रहे।

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