उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है बूंखाल मेला

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। थलीसैंण क्षेत्र में आयोजित बूंखाल कालिंका मेले में शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पतंजलि आयुर्वेद के सह-संस्थापक आचार्य बालकृष्ण और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने पूजा-अर्चना कर आयोजन में प्रतिभाग किया।
आचार्य बालकृष्ण ने मेले को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया, जबकि डॉ. रावत ने प्रशासन की व्यवस्थाओंकृसुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात व शटल सेवाकृकी सराहना की। उन्होंने बताया कि मंदिर का भव्य निर्माण तेजी से जारी है। मेले में पेयजल, चिकित्सा, पार्किंग व सफाई की सुव्यवस्थित व्यवस्था से श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

शटल सेवा से सुचारु हुई यातायात व्यवस्था
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बूंखाल कालिंका मेले में इस वर्ष जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई शटल सेवा अत्यंत प्रभावी साबित हुई। बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने चोपड़ा से मंदिर तक शटल सेवा की पहल की। संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी और एआरटीओ मंगल सिंह ने बताया कि शटल सेवा से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा में मदद मिली। भक्तों ने जिला प्रशासन की इस व्यवस्था की सराहना की।
मेले में पौड़ी पुलिस की सतर्क सुरक्षा
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। माँ बुंखाल कालिंका मंदिर तथा श्री सिद्धबली धाम कोटद्वार में तीन दिवसीय वार्षिक महोत्सव का भव्य शुभारंभ उत्साह और श्रद्धा के साथ हुआ। भीड़ नियंत्रण, यातायात संचालन, मार्ग व्यवस्था और सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु पौड़ी पुलिस द्वारा व्यापक सुरक्षा योजना लागू की गई। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच पुलिस जवान कर्तव्यनिष्ठा और संवेदनशीलता के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाले हुए हैं। राहत सेवाओं और अनुशासन पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जिससे धार्मिक आयोजन शांत, सुरक्षित और श्रद्धामय वातावरण में सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।
