पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में मंत्रोच्चारण के साथ हुआ शीतकालीन यात्रा का शुभारम्भ


गोपेश्वर। पंचकेदार की गद्दी स्थली श्री ओंकारेश्वर मंदिर में मंत्रोच्चारण एवं विधि-विधान के साथ आज शीतकालीन यात्रा का भव्य शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की उपस्थिति एवं भक्ति भाव से सराबोर दिखाई दिया। केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, मंदिर समिति के प्रतिनिधि एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में यात्रा का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने शीतकालीन यात्रा के आरम्भ पर भगवान ओंकारेश्वर से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचकर यात्रा का शुभारम्भ कर चुके थे, और इस वर्ष भी उसी उत्साह एवं श्रद्धा के साथ यात्रा प्रारंभ हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में अधिक संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन लाभ प्राप्त करेंगे।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने जानकारी दी कि यात्रा के सुचारू संचालन हेतु सभी व्यवस्थाएँ पूर्व से ही दुरुस्त कर दी गई हैं। सड़क, पेयजल, विद्युत, पार्किंग एवं सुरक्षा इंतज़ामों को समय रहते सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा का सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है, जिससे क्षेत्रवासियों की आजीविका भी सशक्त होती है।
श्री ओंकारेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग ने कहा कि यह मंदिर पंचकेदार की गद्दी स्थली है तथा यहाँ दर्शन करने से केदारनाथ धाम के दर्शन का ही पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया।
शुभारम्भ कार्यक्रम में बद्री-केदार समिति के सदस्य विनीत पोस्ती, नगर पंचायत अध्यक्ष कुब्जा धर्मवान, ब्लॉक प्रमुख पंकज शुक्ला, मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र सिंह रावत, जिला विकास अधिकारी अनिता पंवार सहित जिला स्तरीय अधिकारी, मंदिर समिति से जुड़े पुजारी, कीर्तन मंडल के सदस्य एवं भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने लगाया स्टॉल

गोपेश्वर। शीतकालीन यात्रा के शुभारम्भ अवसर पर स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद एवं पहाड़ी व्यंजनों के आकर्षक स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों में मंडुवे के उत्पाद, ऑर्गेनिक मसाले, ऊनी वस्त्र तथा घरेलू हस्तनिर्मित वस्तुओं की विविध श्रृंखला देखने को मिली। ग्रामीण आजीविका से जुड़ी महिलाओं की मेहनत और कौशल ने आने वाले श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

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