हावड़ा-दून एक्सप्रेस से टकराकर शिशु हाथी की मौत, ट्रेन हुई लेट, लोको पायलट पर मुकदमा दर्ज

सुमित तिवारी / उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
हरिद्वार। राजाजी टाइगर रिज़र्व के हरिद्वार रेंज में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ। हावड़ा-दून एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 13009) की चपेट में आकर लगभग 6-8 वर्ष के शिशु हाथी की मौत हो गई। यह घटना सुबह 6ः31 बजे योगनगरी क्षेत्र के पास तब हुई जब हाथी रेल पटरी पार कर रहा था। तेज रफ्तार में आती ट्रेन उसे बचा नहीं सकी और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही हरिद्वार रेंज की वन विभाग टीम तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बचाने का कोई प्रयास संभव नहीं था। रेल ट्रैक पर हुए इस हादसे के बाद ट्रेन को कुछ समय के लिए रोक दिया गया, जिससे मार्ग में अन्य ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ा और कई ट्रेनें देरी से चलीं। हादसे में ट्रेन के लोको पायलट खुशी राम मौर्य और सहायक लोको पायलट दीपक कुमार का नाम सामने आया है। वन विभाग ने प्रारंभिक जांच के बाद दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला वन्यजीवों को लेकर रेलवे की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
घटना की सूचना मिलते ही हरिद्वार रेंज की वन विभाग टीम तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बचाने का कोई प्रयास संभव नहीं था। रेल ट्रैक पर हुए इस हादसे के बाद ट्रेन को कुछ समय के लिए रोक दिया गया, जिससे मार्ग में अन्य ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ा और कई ट्रेनें देरी से चलीं। हादसे में ट्रेन के लोको पायलट खुशी राम मौर्य और सहायक लोको पायलट दीपक कुमार का नाम सामने आया है। वन विभाग ने प्रारंभिक जांच के बाद दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला वन्यजीवों को लेकर रेलवे की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
दुर्घटनाओं में हुई लगातार वृद्धि
राजाजी टाइगर रिज़र्व के इस क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से वन्यजीव-रेल दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। हाथी, गुलदार और अन्य वन्यजीव कई बार ट्रेनों की चपेट में आ चुके हैं। वन विभाग ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए रेलवे को पहले भी कई बार पत्र लिखकर संवेदनशील क्षेत्रों में स्पीड लिमिट, हॉर्न का उपयोग, ट्रैक पेट्रोलिंग और अलर्ट सिस्टम को सख्ती से लागू करने की मांग की है। विभाग का कहना है कि यदि रेलवे तय निर्देशों का पालन करे और जोखिम वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
