विद्यार्थियों ने किया ऑर्गन डोनेशन के कानूनी और नैतिक पहलुओं पर विचार
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
देहरादून। सोमवार को डीएवी पीजी कॉलेज की लॉ फैकल्टी में ऑर्गन डोनेशन पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में कॉलेज के लॉ विभाग के प्रमुख डॉ. पारुल दीक्षित, डॉ. राजेश कुमार दुबे, डॉ. विवेक कुमार त्यागी, डॉ. जगत सिंह चंदपुरी, डॉ. रीता पांडेय, डॉ. हरप्रीत कौर और डॉ. प्रतिमान सहित संकाय सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम में सौ से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सेमिनार के मुख्य वक्ता मोहन फाउंडेशन से पधारे डॉ. संचित ने ऑर्गन डोनेशन से जुड़े कानूनी प्रावधानों, नैतिक मानकों और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज़ एक्ट 1994 की महत्ता पर जोर दिया और बताया कि विभिन्न देशों में ऑर्गन डोनेशन के लिए अलग-अलग विधिक ढांचे हैं। डॉ. संचित ने यह भी बताया कि स्पेन और अमेरिका जैसे देशों का ऑर्गन डोनेशन में शीर्ष स्थान है, जबकि भारत आठवें स्थान पर है, जो इस क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है। इसके अलावा, डॉ. संचित ने समाज में प्रचलित मिथकों और भ्रांतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऑर्गन डोनेशन से अगला जन्म प्रभावित होता है जैसे विचार गलत हैं, और भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं, जैसे भगवान गणेश और ऋषि दधीचि के उदाहरण, त्याग और परोपकार की भावना को बढ़ावा देती हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सवाल पूछे और सेमिनार को अत्यंत जानकारीपूर्ण और प्रेरणादायक बताया। कई विद्यार्थियों ने ऑर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल करने का संकल्प लिया। इस सेमिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों में कानूनी समझ के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का संचार करना था। आयोजकों का मानना है कि ऐसे सेमिनार समाज में ऑर्गन डोनेशन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

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