सत्र शुरू होते ही छात्रों को मिली पाठ्य पुस्तकें

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / प्रदीप कुमार,
देहरादून। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहली बार नए शिक्षा सत्र के शुरू होने के मात्र एक सप्ताह के भीतर ही प्रदेशभर के राजकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में 23,71,789 निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें छात्र-छात्राओं को वितरित कर दी गईं। यह उपलब्धि विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व और उनकी सख्ती का परिणाम मानी जा रही है।
कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को समय पर किताबें मिलने से विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के शुरू हो गई हैं। वर्षों से चली आ रही देरी की परंपरा को इस बार शिक्षा विभाग ने समाप्त करते हुए नई मिसाल पेश की है। विभाग के अनुसार नए सत्र 2026-27 के आरंभ के साथ ही किताबों का वितरण तेजी से पूरा किया गया। जनपदवार वितरण में देहरादून में 4,36,134, हरिद्वार में 4,46,311, ऊधमसिंह नगर में 4,25,176, नैनीताल में 1,97,687, चमोली में 1,29,461 और अल्मोड़ा में 1,37,334 किताबें वितरित की गईं। इसके अलावा अन्य जनपदों में भी बड़ी संख्या में पाठ्यपुस्तकें पहुंचाई गईं। शिक्षा विभाग को कुल 78,18,145 पुस्तकों की मांग प्राप्त हुई थी, जिनमें से अधिकांश उपलब्ध करा दी गई हैं, जबकि शेष का वितरण युद्ध स्तर पर जारी है। अधिकारियों को निरंतर निगरानी और फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी विद्यालय में किताबों की कमी न रहे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है और भविष्य में भी ऐसी व्यवस्था बनाए रखी जाएगी।
कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को समय पर किताबें मिलने से विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के शुरू हो गई हैं। वर्षों से चली आ रही देरी की परंपरा को इस बार शिक्षा विभाग ने समाप्त करते हुए नई मिसाल पेश की है। विभाग के अनुसार नए सत्र 2026-27 के आरंभ के साथ ही किताबों का वितरण तेजी से पूरा किया गया। जनपदवार वितरण में देहरादून में 4,36,134, हरिद्वार में 4,46,311, ऊधमसिंह नगर में 4,25,176, नैनीताल में 1,97,687, चमोली में 1,29,461 और अल्मोड़ा में 1,37,334 किताबें वितरित की गईं। इसके अलावा अन्य जनपदों में भी बड़ी संख्या में पाठ्यपुस्तकें पहुंचाई गईं। शिक्षा विभाग को कुल 78,18,145 पुस्तकों की मांग प्राप्त हुई थी, जिनमें से अधिकांश उपलब्ध करा दी गई हैं, जबकि शेष का वितरण युद्ध स्तर पर जारी है। अधिकारियों को निरंतर निगरानी और फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी विद्यालय में किताबों की कमी न रहे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है और भविष्य में भी ऐसी व्यवस्था बनाए रखी जाएगी।
