अब कबाड़ नहीं, कमाई का जरिया बनी चीड़ की पत्तियां: डीएम

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / मोहन सिंह राणा,
उत्तरकाशी। जनपद में स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह ने डुंडा ब्लॉक के चकोन स्थित पिरुल आधारित विद्युत परियोजना का निरीक्षण किया। 25 किलोवाट क्षमता वाले इस प्लांट में चीड़ की पत्तियों (पिरुल) से तैयार ब्रिकेट और पैलेट की गुणवत्ता का जायजा लिया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि पिरुल अब केवल वनाग्नि का कारण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए आय और रोजगार का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने इसके व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान होटल व्यवसायियों के लिए यह सस्ता और पर्यावरण अनुकूल ईंधन साबित हो सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिरुल उत्पादों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे इसकी खपत बढ़े और वनाग्नि की घटनाओं में कमी आए। उरेडा द्वारा संचालित इस प्लांट से उत्पादित बिजली पूर्व में यूपीसीएल को 7.54 रुपये प्रति यूनिट की दर से दी जा रही है। इस दौरान डीएफओ डीपी बलूनी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने कहा कि पिरुल अब केवल वनाग्नि का कारण नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए आय और रोजगार का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने इसके व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान होटल व्यवसायियों के लिए यह सस्ता और पर्यावरण अनुकूल ईंधन साबित हो सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिरुल उत्पादों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे इसकी खपत बढ़े और वनाग्नि की घटनाओं में कमी आए। उरेडा द्वारा संचालित इस प्लांट से उत्पादित बिजली पूर्व में यूपीसीएल को 7.54 रुपये प्रति यूनिट की दर से दी जा रही है। इस दौरान डीएफओ डीपी बलूनी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
