गुर्जरों का इतिहास प्राचीन, शक्तिशाली योद्धा और शासक समुदायों का रहा: स्वामी यतीश्वरानंद


हरिद्वार। गुर्जर बस्ती सिद्ध स्रोत में मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें गुर्जर समाज के इतिहास, संघर्ष और योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद ने शिरकत की।
स्वामी यतीश्वरानंद ने अपने संबोधन में कहा कि गुर्जर केवल एक जाति नहीं, बल्कि भारत के इतिहास में एक प्राचीन, शक्तिशाली योद्धा और शासक समुदाय रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा से लेकर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक, गुर्जर समाज की अहम भूमिका रही है। विशेष रूप से वन गुर्जरों के संघर्ष और अपनी परंपराओं को सहेजकर रखने के जज्बे की उन्होंने सराहना की। अंतरराष्ट्रीय गुर्जर महासभा के अध्यक्ष कर्नल देवानंद गुर्जर ने कहा कि ‘गुर्जर’ शब्द का अर्थ शत्रु विनाशक होता है। उन्होंने बताया कि 6वीं से 12वीं शताब्दी के बीच गुर्जरों ने अरब आक्रांताओं को रोककर देश की संस्कृति और सीमाओं की रक्षा की। साथ ही 1857 की क्रांति में मेरठ के कोतवाल धन सिंह गुर्जर जैसे वीरों के योगदान को भी उन्होंने याद किया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह ने कहा कि आज गुर्जर समाज प्रशासन, राजनीति, उद्यम और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वहीं इतिहासकार सुशील भाटी ने गुर्जरों के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उनके शौर्य, अस्मिता और बलिदान की परंपरा को विस्तार से बताया। कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में समाज की एकता, शिक्षा और प्रगति के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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