पर्यटन नगरी के आसपास के मंदिरों में एक प्रमुख स्थान मां झूला देवी का है। मां झूलादेवी पर श्रद्धालुओं एंव भक्तों की अगाध अटूट आस्था है।

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / भुवन बिष्ट,
रानीखेत। देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव ही देवों की तपोभूमि रही है। यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्वविख्यात है वहीं इसकी संस्कृति,सभ्यता, परंपरा सदैव विश्वविख्यात है। देवभूमि उत्तराखंड सदैव अटूट एंव अगाध आस्था का केन्द्र भी रहा है। पर्यटन नगरी रानीखेत अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्व विख्यात है वहीं इसके आसपास अनेक मंदिर इसकी शोभा को और बढ़ा देते हैं। इन मंदिरों में नवरात्रों में हो या कोई त्यौहार उत्सव हर समय चहल पहल एंव भीड़ सदैव देखी जाती है। देवभूमि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत के आसपास झूलादेवी, कालिका मंदिर मनकामेश्वर मंदिर, पंचेश्वर मंदिर, हैड़ाखान,नंदा देवी मंदिर आदि मंदिरों में भक्तों की सदैव भीड़ लगी रह रही है। पर्यटन नगरी होने कारण भी देश विदेश के पर्यटक इन मंदिरों में दर्शन को पहुंचते हैं। पर्यटन नगरी के इन मंदिरों में एक प्रमुख स्थान मां झूला देवी का है। मां झूलादेवी पर श्रद्धालुओं एंव भक्तों की अगाध अटूट आस्था है। रानीखेत नगर से चौबटिया मार्ग पर रानीखेत से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भव्य माता झूलादेवी का मंदिर। सुंदर मनमोहक रमणीक स्थान पर देवदार एंव बुरांश के वनों के मध्य में माता का मंदिर स्थित है। माना जाता है कि सच्चे मन से जो भी माता के दरबार में आता है, उसकी हर मुराद हर मनोकामना माता झूलादेवी पूरा करती है। झूलादेवी को मां सिंहसवारी ,मां दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि लगभग आठवीं सदी में यह स्थान सुनसान चरागाह था। इस मंदिर का निर्माण जंगली जानवरों से रक्षा के उद्देश्य को लेकर किया गया था। रानीखेत नगर से लगभग आठ किलोमीटर दूर शांत एंव एंकात रमणीक स्थल पर मां झूलादेवी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह स्थान चौबटिया,पन्याली,पिलखोली,जैनोली
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।
का मंत्र जाप भी किया जाता है । माता झूलादेवी को सिंह सवारी , मां दुर्गा के रूप में आराधना की जाती है। सबकी मुराद मनोकामना माता झूलादेवी पूरा करती है। भारत भूमि में चारों ओर खुशहाली मानवता सदा फैले।
भक्तों की अटूट आस्था है माता झूलादेवी पर
मां झूलादेवी पर श्रद्धालुओं एंव भक्तों की अगाध अटूट आस्था है। रानीखेत नगर से चौबटिया मार्ग पर रानीखेत से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भव्य माता झूलादेवी का मंदिर। सुंदर मनमोहक रमणीक स्थान पर देवदार एंव बुरांश के वनों के मध्य में माता का मंदिर स्थित है। माना जाता है कि सच्चे मन से जो भी माता के दरबार में आता है, उसकी हर मुराद हर मनोकामना माता झूलादेवी पूरा करती है। झूलादेवी को मां सिंहसवारी ,मां दुर्गा के रूप में पूजा जाता है
पर्यटन नगरी के मंदिरों में एक प्रमुख स्थान है मां झूला देवी का
पर्यटन नगरी रानीखेत के आसपास झूलादेवी, कालिका मंदिर , मनकामेश्वर मंदिर, पंचेश्वर मंदिर, हैड़ाखान,नंदा देवी मंदिर आदि मंदिरों में भक्तों की सदैव भीड़ लगी रह रही है। पर्यटन नगरी होने कारण भी देश विदेश के पर्यटक इन मंदिरों में दर्शन को पहुंचते हैं। पर्यटन नगरी के इन मंदिरों में एक प्रमुख स्थान मां झूला देवी का है। मां झूलादेवी पर श्रद्धालुओं एंव भक्तों की अगाध अटूट आस्था है।
