लोहारी गांव में यमुना नदी का सीना चीर रहे खनन माफिया, सड़कों पर हो रहा खनिज भंडारण

उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / गजमफर अली,
देहरादून। कालसी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत लोहारी गांव के पास यमुना नदी में इन दिनों अवैध खनन का खेल जोरों पर चल रहा है। स्थानीय खनन माफिया खुलेआम उत्तराखंड सरकार के नियमों को ताक पर रखकर नदी से रेत और बजरी निकाल रहे हैं। आरोप है कि लखवाड़ बांध परियोजना की आड़ में यह अवैध गतिविधियां लंबे समय से संचालित हो रही हैं। नदी से निकाले गए खनिज पदार्थों को गांव की सड़कों के किनारे बड़े पैमाने पर जमा किया जा रहा है, जिन्हें बाद में मसूरी जैसे पर्यटन क्षेत्रों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इससे जहां खनन माफिया मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं राज्य सरकार को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
रात के समय गरज रही जेसीबी
स्थानीय लोगों के अनुसार लोहारी गांव जाने वाली सड़क पर एक निजी होटल और एलएनटी कंपनी के आसपास भारी मात्रा में रेत और बजरी का अवैध भंडारण किया गया है। यदि इन भंडारण स्थलों की पैमाइश की जाए तो यहां करोड़ों रुपये की खनिज संपदा जमा होने का अंदेशा है। सूत्र बताते हैं कि रात के समय जेसीबी मशीनों की मदद से यमुना नदी में अवैध खनन किया जाता है। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों के माध्यम से खनिज सामग्री को नदी से निकालकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया जाता है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस अवैध खनन पर अभी तक प्रशासनिक विभागों की कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री ने इकबालपुर चौकी को किया था निलंबित
गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार जिले के इकबालपुर क्षेत्र में अवैध खनन से जुड़े मामले में कई पुलिसकर्मियों की संदिग्ध भूमिका पाए जाने पर उन्हें निलंबित किया था और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि प्रदेश में किसी भी प्रकार का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद कालसी तहसील, थाना कालसी और रिवर रेंज डाकपत्थर के क्षेत्र में खुलेआम खनन माफिया सक्रिय नजर आ रहे हैं। जब इस संबंध में तहसील विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
जल्द की जाएगी कार्रवाई
खनन अधिकारी ऐश्वर्या शाह ने बताया कि यदि अवैध खनन की सटीक लोकेशन उपलब्ध कराई जाती है और भंडारण अवैध पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यमुना नदी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
