टिहरी लेक फेस्टिवल में छुंईं बथ के जरिए टिहरी के इतिहास और यादों पर हुई भावनात्मक चर्चा


टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। टिहरी लेक फेस्टिवल के दौरान आयोजित ‘छुंईं बथ’ कार्यक्रम में टिहरी की ऐतिहासिक नगरी से जुड़ी पुरानी यादों और घटनाओं पर भावनात्मक चर्चा हुई। ‘छुंईं बथ’ यानी वह संवाद, जो टिहरी के इतिहास, संघर्ष और स्मृतियों को अपने भीतर समेटे हुए है। पहली बार लेक फेस्टिवल में इस तरह का आयोजन हुआ, जिसमें कई सुनी-अनसुनी बातों ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया। कार्यक्रम में टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय और जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल भी सहभागी रहे।


वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार महीपाल नेगी ने बताया कि एक समय ऐसा था जब टिहरी तक सड़क नहीं थी, लेकिन महाराजा कीर्ति शाह कार लाने के इच्छुक थे। उन्होंने कार के अलग-अलग हिस्से टिहरी मंगवाए और उन्हें वहीं जोड़कर कार तैयार की गई, जिसके बाद टिहरी में महाराजा की कार दौड़ी। टिहरी बांध आंदोलन के संदर्भ में शैलेंद्र नौटियाल ने बताया कि जब आंदोलन कमजोर पड़ रहा था और लोगों का मनोबल टूटने लगा था, तब पर्यावरणविद् स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा ने लोगों से श्रीदेव सुमन के संघर्ष को याद करने की बात कही, जिससे आंदोलनकारियों में नया जोश आया। कार्यक्रम में टिहरी की रामलीला की भी चर्चा हुई, जिसकी शुरुआत 1952 में हुई थी। सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर अब इस परंपरा को देहरादून में जीवित रखे हुए हैं। कार्यक्रम के अंत में झील किनारे संकल्प लिया गया कि ‘छुंईं बथ’ जैसी पहल को भविष्य में और व्यापक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। आयोजन में महीपाल नेगी, अमित पंत, प्रमोद रावत और देवेंद्र नौटियाल की विशेष भूमिका रही।

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