अब होगा गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शंखनाद, 11 मार्च को लखनऊ में होगा निर्णायक कार्यक्रम

सुमित तिवारी / उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
देहरादून/वाराणसी। गोमाता को राज्यमाता घोषित करने तथा उत्तर प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की माँग को लेकर घोषित ४० दिनों की समय-सीमा में से ३० दिन पूर्ण हो चुके हैं। पूर्व में ११वें और २१वें दिन दी गई चेतावनियों के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। यह चुप्पी जनभावनाओं की उपेक्षा का संकेत मानी जा रही है। अब शेष १० दिनों पर ही सारी आशाएँ टिकी हैं।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ पूर्णतः अहिंसक और वैचारिक होगा। सात मार्च से काशी से लखनऊ तक ‘गोप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न जनसभाओं के माध्यम से जनसमर्थन जुटाया जाएगा। ६ मार्च को संकल्प दिवस पर गंगा पूजन के साथ यात्रा का संकल्प लिया जाएगा। ७ से १० मार्च तक जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, नैमिषारण्य होते हुए यात्रा ११ मार्च को लखनऊ पहुँचेगी। ११ मार्च को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, आशियाना, लखनऊ में दोपहर २रू१५ बजे से सायं ५ बजे तक मंगलाचरण, गो-ध्वज प्रतिष्ठा और धर्मयुद्ध शंखनाद का कार्यक्रम आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार यह शासन के लिए अंतिम चेतावनी सिद्ध होगा।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ पूर्णतः अहिंसक और वैचारिक होगा। सात मार्च से काशी से लखनऊ तक ‘गोप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा’ निकाली जाएगी, जिसमें विभिन्न जनसभाओं के माध्यम से जनसमर्थन जुटाया जाएगा। ६ मार्च को संकल्प दिवस पर गंगा पूजन के साथ यात्रा का संकल्प लिया जाएगा। ७ से १० मार्च तक जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव, नैमिषारण्य होते हुए यात्रा ११ मार्च को लखनऊ पहुँचेगी। ११ मार्च को कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, आशियाना, लखनऊ में दोपहर २रू१५ बजे से सायं ५ बजे तक मंगलाचरण, गो-ध्वज प्रतिष्ठा और धर्मयुद्ध शंखनाद का कार्यक्रम आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार यह शासन के लिए अंतिम चेतावनी सिद्ध होगा।
