भ्रदा समाप्ति के बाद होलिका दहन रहेगा शास्त्रसम्मत: दैवज्ञ
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / बेनीराम उनियाल,
देहरादून। होली पर्व को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल दैवज्ञ ने शास्त्रसम्मत मार्गदर्शन जारी कर जनमानस की शंकाओं का समाधान किया है।
उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की प्रदोष काल में भद्रा रहित समय में किया जाता है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को प्रदोष काल में है, किंतु 3 मार्च को सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है। ऐसे में 2 मार्च की रात्रि 1ः27 से 2ः39 बजे भद्रा के पुच्छ काल में अथवा 3 मार्च को भद्रा समाप्ति के बाद प्रातः 5ः30 से 6ः20 बजे तक होलिका दहन शास्त्रसम्मत रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण होने के कारण धूलंडी 4 मार्च को फाल्गुन प्रतिपदा में मनाना उचित होगा। साथ ही उन्होंने सभी को सौहार्द, संयम और सुरक्षित रंगों के साथ होली मनाने की अपील की।
