– उद्यान विभाग की अनुमति से 44 पेड़ों की कटाई, बदले में लगाए गए 100 से अधिक नए पौधे
– कीट और बीमारियों से लगातार हो रहे नुकसान के बाद किसानों ने बदला फसल पैटर्न
– आम के पुराने बाग की जगह अमरूद, नींबू और मौसंबी की उन्नत किस्में लगाई जा रही
– विधिवत अनुमति लेकर की गई कटाई, नियमों का किया पालन
– नई फसलों से भविष्य में बेहतर उत्पादन और स्थायी आमदनी की उम्मीद
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो,
हरिद्वार। ग्राम जियापोता में उद्यान विभाग की अनुमति के बाद पुराने आम के बाग को हटाकर अब बड़े पैमाने पर नए फलदार पौधों का रोपण किया जा रहा है। विभागीय शर्तों के अनुसार प्रत्येक कटे पेड़ के बदले दो नए पौधे लगाए जाने थे। इसी क्रम में बाग स्वामियों की ओर से अब तक 100 से अधिक फलदार पौधे रोपित किए जा चुके हैं। इस पहल को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
बाग स्वामी इंदर मोहन ने बताया कि पिछले कई वर्षों से आम की फसल लगातार खराब हो रही थी। उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ पेड़ों में कीट और रोग का प्रकोप बढ़ गया था, जिससे हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में उद्यान विभाग से विधिवत अनुमति लेकर पुराने और रोगग्रस्त आम के पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि अब बाग में अमरूद, नींबू और मौसंबी जैसी उन्नत किस्मों के फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं, जो भविष्य में बेहतर उत्पादन और स्थायी आय का साधन बनेंगे। बाग स्वामी कौशल किशोर और चेतना भसीन ने बताया कि तीनों भाइयों ने संयुक्त रूप से कुल 44 आम के पेड़ों को काटने की अनुमति प्राप्त की गई थी। विभागीय नियमों और शर्तों का पूरी तरह पालन करते हुए ही कटाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई और अब उससे कहीं अधिक संख्या में नए पौधे रोपित किए जा रहे हैं। किसान इसरार ने बताया कि मौके पर मौजूद अधिकांश आम के पेड़ धीरे-धीरे खराब हो चुके थे। पेड़ों में कीड़े लगने से फसल प्रभावित हो रही थी और हर साल नुकसान झेलना पड़ रहा था। इसी कारण उद्यान विभाग से अनुमति लेकर नई फसलों की ओर रुख किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई फलदार फसलों से आने वाले समय में किसानों को अधिक मुनाफा मिलेगा। आम के पेड़ काफी खराब हो रहे थे इसी को देखते हुए फसल भी काम हो रही थी और भारी नुकसान हो रहा था।

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