उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / राजकुमार,

हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है।
जहां एक ओर प्रशासन अतिक्रमण हटाने को लेकर लगातार कार्रवाई कर रहा है, वहीं नेशनल हाईवे हरिलोक तिराहे पर कार्यरत कर्मचारियों द्वारा सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की भूमि पर बिना अनुमति कब्जा किए जाने का मामला उजागर हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, हाईवे कर्मचारियों ने सरकारी भूमि पर अवैध रूप से आशियाना तैयार कर लिया, साथ ही हाईवे की फ्लावर डिवाइडर में इस्तेमाल होने वाला मैट्रियल भी उसी भूमि पर रखा जा रहा है।

 

निरीक्षण में खुली पोल

मामले की शिकायत मिलने के बाद सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की टीम मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंची। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित लोगों के पास कोई वैध अनुमति या दस्तावेज मौजूद नहीं हैं।
टीम ने मौके पर मौजूद लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि

“दो से तीन दिन के भीतर वैध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए तो नियमानुसार नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

 

प्रशासनिक दोहरे रवैये पर सवाल

 

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि

गरीबों की झुग्गियों पर तत्काल बुलडोजर

लेकिन विभागीय कर्मचारियों के अतिक्रमण पर सिर्फ चेतावनी

यह दोहरे मापदंड प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।

 

 

कार्रवाई या कागजी चेतावनी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग/प्रशासन तय समय सीमा के बाद वास्तव में नोटिस जारी कर अवैध कब्जा हटाएगा, या यह मामला भी केवल कागजी चेतावनियों तक ही सीमित रह जाएगा।
मामले पर प्रशासन और शासन की अगली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

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