कई व्यापारियों ने किया समर्थन, तो कहीं व्यापारियों ने बंद का किया विरोध


श्रीनगर गढ़वाल। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदेश बंद का उत्तराखंड में मिलाजुला असर देखने को मिला। कुछ जिलों में सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने प्रदर्शन व जनसंपर्क के माध्यम से बंद का समर्थन किया, वहीं कई क्षेत्रों में बाजार खुले रहे और जनजीवन सामान्य बना रहा। बंद को लेकर अलग-अलग वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कहीं इसे पीड़िता को न्याय दिलाने की सामूहिक आवाज बताया गया, तो कहीं सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद बंद को अनावश्यक माना गया। कुल मिलाकर प्रदेश में बंद का आंशिक प्रभाव ही देखने को मिला।
प्रस्तावित उत्तराखंड बंद के समर्थन में बुधवार को विभिन्न सामाजिक व छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने बाजार क्षेत्र में शांतिपूर्ण जनसंपर्क और प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने दुकानदारों, आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों से बंद को सफल बनाने की अपील की तथा हाथों में तख्तियां लेकर “पहाड़ की बेटी को न्याय दो” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए है। वक्ताओं ने कहा कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, संघर्ष जारी रहेगा। स्थानीय नागरिकों ने भी अंकिता को पूरे पहाड़ की बेटी बताते हुए सरकार से संवेदनशीलता और ठोस कार्रवाई की मांग की।


हरिद्वार में कांग्रेस ने पैदल मार्च निकालकर की अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग

हरिद्वार। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं सोम त्यागी और मनोज सैनी, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष विकास चंद्रा के नेतृत्व में, अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आयोजित उत्तराखंड बंद के समर्थन में पैदल मार्च शिवमूर्ति से हरकी पैड़ी तक किया गया।
इस अवसर पर नेताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों में बेटियां असुरक्षित हैं और अंकिता भंडारी न्याय की प्रतीक्षा में है। व्यापारियों से भी आह्वान किया गया कि वे अपने प्रतिष्ठान बंद कर इस आंदोलन में सहभागिता करें। प्रदेश कांग्रेस सचिव भगवती प्रसाद सेमवाल और सोहनलाल रतूड़ी ने कहा कि सीबीआई जांच तभी निष्पक्ष हो सकती है जब हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में की जाए।
वरिष्ठ नेता अशोक शर्मा और अनिल भास्कर ने महिला अपराध में वृद्धि की ओर ध्यान आकर्षित किया। युवा और महिला नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देकर सत्ता में आई, लेकिन आज महिलाएं असुरक्षित हैं। पैदल मार्च में महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग, पार्षद हिमांशु गुप्ता, एनएसयूआई अध्यक्ष याज्ञिक वर्मा, युवा नेता ऋषभ वशिष्ठ, नमन अग्रवाल, विकास चंद्रा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने प्रतिज्ञा की कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता, कांग्रेस सड़क से सदन तक संघर्ष करती रहेगी।


रूद्रप्रयाग में नहीं दिखा कोई खास असर

रूद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में उत्तराखंड बंद का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। मुख्यमंत्री द्वारा मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद व्यापारिक संगठनों ने बंद से दूरी बना ली, जिससे जनजीवन सामान्य बना रहा। व्यापारियों ने कहा कि रविवार का साप्ताहिक अवकाश नियमित प्रक्रिया है और इसका बंद से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि निष्पक्ष जांच से पीड़िता को न्याय मिलेगा।

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