जन जन कर रहा वंदन नूतन वर्ष तुम्हारा अभिनंदन
उत्तराखंड प्रहरी ब्यूरो / भुवन बिष्ट,
नूतन वर्ष में नव आश का हर मन में हो संचार।
चहुँ दिशा में फैले मानवता करना यह उपकार।।
छब्बीस के अभिनंदन को जन जन है तैयार।
नव वर्ष में हर आँगन में बहे खुशियों की धार।।
चहुँ दिशा में फैले मानवता करना यह उपकार।।
छब्बीस के अभिनंदन को जन जन है तैयार।
नव वर्ष में हर आँगन में बहे खुशियों की धार।।
रानीखेत। समय बीतते जाता है और समय की धार में रह जाती हैं केवल हमारे मन में यादें। सन् दो हजार पच्चीस अपनी खट्टी मिठी यादों को समेटे विदाई ले रहा है वही नूतन वर्ष सन् दो हजार छब्बीस का अभिनंदन हम सभी कर रहे हैं। सन् दो हजार पच्चीस में उत्तराखंड में हुई दुर्घटनाओं ने सभी के मन को व्यथित किया यह साल बीतते बीतते भी कुमाऊं में एक भयंकर बस दुर्घटना का जख्म हर जनमानस को दे गया। सन् दो हजार पच्चीस की विदाई और सन् दो हजार छब्बीस के आगमन पर जहां नयी पंचायतों का गठन चुका है वहीं सभी इस वर्ष नये चुने गए प्रतिनिधि अपने अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को धरातल उतारने के लिए जुट गए हैं। त्रिस्तरीय पंचायतों में प्रशासक के रूप में पद प्राप्ति के लिए भी सन् दो हजार पच्चीस यादगार रहा। सन् दो हजार पच्चीस की विदाई कुछ ठंडक तो कुछ गुनगुनी धूप के साथ राजनैतिक गलियारों में गर्मी लाये हुए हैं। दो हजार पच्चीस में राजनैतिक दलों के लिए राज्यों में हुए चुनावों के लिए भी यादगार रहा क्योंकि विभिन्न दलों में कुछ ने खोया तो कुछ ने पाया। पच्चीस में पूरे देश में एसआईआर का खूब बोलबाला रहा। पच्चीस में आम जनमानस के लिए सोने चांदी के लगातार बढ़ते दामों से बेचौनी अवश्य रही। सोना आमजन की पहुंच से अब बहुत दूर होते जा रहा है। समय की बहती धार में सरकारों द्वारा विभिन्न योजनाओं का संचालन लोकार्पण किया जा रहा। लेकिन महंगाई बेरोजगारी का बोझ उठाये पच्चीस की गठरी फिर से छब्बीस ने भी थाम ली है। महंगाई का हाल पच्चीस में भी बेहाल रहा। दैनिक उपयोग की वस्तुएं राशन सब्जी सभी महंगाई का दामन थामे रहे। देवभूमि उत्तराखंड में सन् दो हजार पच्चीस में अपने स्थापना के पच्चीस वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती के रूप में मनाया गया। गांवों के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं को चलाया जा रहा है किन्तु पलायन का दर्द भी पच्चीस सहन करते रह गया। नव वर्ष के आगमन के साथ ही सभी के मन में नव आशाओं का संचार हो ऐसा इस समय हर जनमानस हर भारतवासी मंगलकामनाऐं कर रहा है। वर्ष 2025 अपनी खट्टी मिठी यादें लेकर विदाई ले चुका है। वक्त की बहती धार में सब कुछ बीतते चला जाता है चाहे वह अच्छा समय हो अथवा बुरा समय। दुःख का समय अवश्य ही बहुत विशाल सा लगता है किन्तु समय की बहती धारा में वह वक्त भी बीत जाता है। समय बीतते जाता है और बहते वक्त की धाराओं में रह जाती हैं केवल यादें, कुछ यादों को हम समय के साथ साथ भूलते जाते हैं और कुछ यादें हमारे दिल में जगह बनाकर रह जाती हैं। यादें कुछ अच्छाई समेटे हुये होती हैं तो कुछ यादें बुराई समेटे हमें बहुत समय तक पीड़ा प्रदान करते रहती हैं। फिर एक बार अनेक प्रश्नों को लेकर दो हजार पच्चीस की विदाई और ये विचारणीय प्रश्न साल दर साल बीतते जाते हैं और प्रश्न केवल प्रश्न बनकर रह जाते हैं अनेक खट्टी मिठी यादों को समेटकर साल दो हजार पच्चीस ले रहा विदाई । सन् पच्चीस का अब केवल यादों का मन में होगा वंदन और सभी जनमानस सारे जग में भारतभूमि में खुशहाली सुख समृद्धि देशप्रेम मानवता की मंगलमय कामनाओं को लेकर कर रहे हैं सन् दो हजार छब्बीस का अभिनंदन।
