Sat. Jan 25th, 2020

सेमेस्टर प्रणाली छात्र हित में तो किसके निशाने पर कुलपति

1 min read

हरप्रीत

उत्तराखंड के श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में सेमेस्टर प्रणाली के विरोध के बहाने कुलपति पर निशाना लगाया जा रहा है। कुछ छात्र संगठन के नेता वर्तमान कुलपति की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए सेमेस्टर प्रणाली को खत्म कर वार्षिकी परीक्षा कराने की मांग पर अड़े है। जबकि हकीकत यह है कि कुछ ही दिनों पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति की कुर्सी पर बैठे निजी कॉलेजों और सरकारी कॉलेजों की व्यवस्थाओं को दुरस्त करने में लगे है। पटरी से उतरी उच्च शिक्षा व्यवस्था को ढर्रे पर लाने की कोशिश कर रहे है। वही दूसरी ओर सेमेस्टर प्रणाली पूरी तरह से छात्रों के हित में है। इसके चलते कॉलेज के छात्रों को अच्छी तरह पढ़ाई करने का अवसर प्रदान होगा तथा बेहतर अंक मिल पायेंगे। लेकिन सियासी एजेंडे की तरह सेमेस्टर प्रणाली को मुददा बनाकर कुलपति को टारगेट किया जा रहा है।
बताते चले कि पूर्व में उच्च शिक्षा प्रणाली में वार्षिकी परीक्षा होती थी। लेकिन बीते कुछ सालों से उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के प्रयासों के चलते केंद्र की मोदी सरकार ने सेमेस्टर प्रणाली लागू करने की पहल की गई तथा रोजगार परक शिक्षा पर बल दिया है। इसी के चलते दो सालों पूर्व सेमेस्टर प्रणाली अमल में लाई गई। हालांकि इस नीति का विरोध हुआ। लेकिन नई शिक्षा नीति के मसौदे में सेमेस्टर प्रणाली पूरी तरह से प्रभावी होने की पूरी संभावना है। वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक नई शिक्षा नीति को लेकर मंथन कर रहे है। वही दूसरी ओर यूसीजी और नेक सेमेस्टर प्रणाली का पक्षधर है। यूजीसी उच्च शिक्षा के मानक तय करता है। इसी के साथ भारत सरकार की नई शिक्षा नीति में सभी महाविद्यालय में साल 2021 से नेक अनिवार्य करने की प्रबल संभावना। जिस महाविद्यालय पर नेक का प्रमाण पत्र नही होगा उसकी मान्यता रदद कर दी जायेगी। नेक प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए सेमेस्टर प्रणाली जरूरी है। इसी के चलते श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीपी ध्यानी ने विश्वविद्यालय की संबद्धता के सभी निजी कॉलेजों में सेमेस्टर प्रणाली से परीक्षा कराने के निर्देश दिए। निजी कॉलेज संचालक परीक्षा कराने की तैयारियों में जुट गए। लेकिन इसी बीच कुछ मुटठी भर नेता छात्रों को भ्रमित कर अपनी राजनीति चमकाने में लगे है। इन नेताओं ने इस मामले को तूल दिया और कुलपति के खिलाफ अपना आक्रोष व्यक्त किया। चंद नेताओं ने सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षाओं के बहाने कुलपति पीपी ध्यानी के लिए दिक्कत खड़ी करनी शुरू कर दी। जबकि पिछले साल भी सेमेस्टर प्रणाली के तहत ही परीक्षा हुई। कॉलेज और छात्र सेमेस्टर प्रणाली के पक्षधर है। कुलपति सेमेस्टर परीक्षा कराना चाहते है। तो परदे के पीछे से कौन है तो इस मामले को तूल देकर कुलपति के लिए मुसीबत खड़ी करना चाहता है। ये पूरा सियासी एजेंडा है। छात्र नेता मोहरा बनकर आगे है।
सेमेस्टर प्रणाली क्या है
विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक सेमेस्टर प्रणाली में साल में दो बार परीक्षाएं कराई जाती है। इसमें छह माह में दो बार विश्वविद्यालय की ओर से 70 नंबर की एक्टरनल परीक्षा और कॉलेज प्रबंधन की ओर से 30 नंबर की इंटरनल परीक्षा होती है। इस तरह 200 नंबर की परीक्षा साल में दो बार होती है। जिसमें छात्रों को परीक्षा में अच्छे अंक लाने का अवसर भी मिलता है। छात्र किताबों के ज्यादा नजदीक रहते है।
सेमेस्टर प्रणाली के फायदे
—सेमेस्टर प्रणाली पूरी तरह से छात्र हित में है। इस प्रणाली के चलते छात्रों के साल खराब होने की संभावना कम होती है। छात्र पहले सेमेस्टर के किसी विषय में फेल होने की स्थिति में  तीसरे सेमेस्टर में उसी विषय की परीक्षा दे सकता है। सरकार की ओर से यह व्यवस्था पूरी तरह स्टूडेंट्स के हित में है। इसमें एक साल का कोर्स दो भागों में बंट जाता है। इससे आधा कोर्स छह महीने में और बाकी का आधा कोर्स फ्री माइंड से अगले छह महीनों में पूरा हो जाता है। सेमेस्टर  प्रणाली से छात्रों को अपना मूल्यांकन करने का मौका भी मिलता है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!