Sat. Jan 25th, 2020

केबिनेट मंत्री मदन कौशिक की पहल पर सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म

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नवीन चौहान
केबिनेट मंत्री मदन कौशिक की पहल पर सफाईकर्मियों ने अपनी हड़ताल वापिसी लेने का निर्णय कर दिया है। सफाईकर्मियों के प्रतिनिधियों ने केबिनेट मंत्री मदन कौशिक के घर पहुंचकर समस्या का समाधान करने की मांग उठाई। जिसके बाद केबिनेट मंत्री ने एमएनए को फोन कर सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म कराने और बीच का रास्ता निकालने का सुझाव दिया। सफाईकर्मियों से बातचीत के बाद एमएनए ने केआरएल कंपनी को 24 घंटे का नोटिस देने और एक करोड़ की बैंक गारंटी जब्त करने के अल्टीमेटम देने का नोटिस तैयार किया। इस नोटिस पर मेयर अनिता शर्मा ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। हालांकि सफाईकर्मियों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल खत्म की बात सार्वजनिक का दी है। जिसके बाद सफाईकर्मी नगर निगम क्षेत्र से कूड़ा डठाने के लिए राजी हो गए है।
नगर निगम क्षेत्र की सफाई करने वाले केआरएल सफाई कर्मचारियों के चार दिनों से हड़ताल पर होने से शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई। हरिद्वार के विभिन्न स्थानों पर कूड़े के ढेर लग गए। हरिद्वार बीमारी की जद में आने के मुहाने पर खड़ा हो गया। वही दूसरी ओर कांग्र्रेस की मेयर अनिता शर्मा और भाजपा पार्षदों के बीच राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई। कांग्रेस मेयर अनिता शर्मा, भाजपा पार्षद और केआरएल के अधिकारी व सफाईकर्मी अपने-अपने तर्क देते रहे। लेकिन शहर गंदगी की चपेट में आता चला गया। सियासत तेज होने लगी। जनता नेताओं से नाराज होने लगी। सोशल मीडिया पर नेताओं के खिलाफ बहस तेज हो गई। अचानक केआरएल के सफाईकर्मियों ने शनिवार की सुबह मदन कौशिक के आवास पर पहुंचकर इस मामले का पटाक्षेप करने की गुहार लगाई। आखिरकार सफाईकर्मचारियों के प्रयास रंग लाए। केबिनेट मंत्री मदन कौशिक के बताए मार्ग का अनुसरण करते हुए एमएनए अशोक पांडेय ने सफाईकर्मियों की समस्या का निस्तारण करते हुए हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने के लिए राजी कर लिया। अब देखना होगा कि इस 24 घंटे के अल्टीमेटम पर मेयर अनिता शर्मा का क्या रूख रहने वाला है। हालांकि मेयर अनिता शर्मा के प्रतिनिधि अशोक शर्मा ने बताया कि जो केआरएल कंपनी खराब लग रही थी। वह मदन कौशिक के कहने के बाद अच्छी कैसे हो गई। आखिरकार नगर निगम में मदन कौशिक की दखल के चलते ही ये सब ड्रामेबाजी हो रही है। एमएनए ने जो नोटिस मेयर साहिबा को हस्ताक्षर करने के लिए दिया गया था। उस नोटिस पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया गया है।

 

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