Sat. Jan 25th, 2020

पहाड़ पर तैनात पुलिसकर्मियों से कुछ सीख ले हरिद्वार पुलिस

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नवीन चौहान
हरिद्वार जनपद पुलिस को पहाड़ी जनपद में तैनात पुलिसकर्मियों से कुछ सीख लेना चाहिए। आखिरकार पुलिसकर्मियों को वेतन तो जनता के द्वारा चुकाए गए टैक्स से ही मिलता है। ऐसे में अपने पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। चलिए मुददे की बात करते है। बाल श्रम एक दंडनीय अपराध है। 12 जून को विश्व बाल श्रम दिवस के दिन हरिद्वार में सैंकड़ों बच्चे होटल और ढाबों पर काम करते दिखाई देंगे। लेकिन हरिद्वार पुलिस के पास इन बच्चों की सुरक्षा के लिए फुरर्सत नही है। जबकि रूद्रप्रयाग पुलिस ने एक होटल मालिक के खिलाफ बाल श्रम के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। ऐसे में हरिद्वार पुलिस को अभियान चलाकर इन ढाबे संचालकों और होटल मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
12 जून को विश्व बाल श्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस पर रूद्रप्रयाग पुलिस की टीम श्रम प्रवर्तन अधिकारी जयपाल सिंह के सयुंक्त चेकिंग करने निकली। इस टीम ने रुद्रप्रयाग स्थित सभी होटल/ढाबों में निरीक्षण करना शुरू कर दिया। होटलों में बाल श्रम जैसे कृत्य को पकड़ने के लिए निकली टीम को चेकिंग की दौरान शिवम होटल/ढाबा में सफलता मिली। वहां एक 12 वर्षीय बालक से होटल में काम करवाया जा रहा था। यह देख मौके पर होटल मालिक भगवती प्रसाद भट्ट के विरुद्ध धारा 3 बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम और विनियम अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया। वही रुद्रप्रयाग पुलिस द्वारा इस प्रकार के अमानवीय कृत्यों की निंदा की गई। रूद्रप्रयाग पुलिस श्रम विभाग के साथ जानकर अपने कर्तव्यपरायणता का फर्ज अदा कर दिया। बाकी जनपदों की पुलिस और श्रम विभाग की नींद कब टूटेंगी। हरिद्वार जैसे संवेदनशील जनपदों में तो बाल श्रम ​के तमाम मामले देखने को मिल जायेंगे। सिडकुल के ढाबो और होटलों की चेकिंग की जाए तो वहां मासूम काम करते दिखेंगे। लेकिन श्रम विभाग लापरवाह बना हुआ है। पुलिस के पास अन्य कायों की जिम्मेदारी है। ऐसे में बाल श्रम दिवस के औचित्य पर सवाल उठना लाजिमी है।

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