Sun. Dec 15th, 2019

हरिद्वार के युवा नशे की जद में, गुरूकुल के छात्र ने सर्वे में किए कई रोचक खुलासे

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आकांक्षा चौहान
हरिद्वार का युवा वर्ग डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारी की जद में है। इस बीमारी की वजह भी युवाओं ने खुद ही लगाई है। शौक और मस्ती करने के कारण पड़ी धूम्रपान की लत अब उनको अपनी चपेट में ले रही है। ये बात गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जन्तु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो पीसी जोशी के निर्देशन में अमित कुमार वर्मा ने डायबिटीज में शामिल लोगों की लिसिकल रिवर वार्निंग पर अध्ययन करने के बाद खुलासा किया है। शोध छात्र ने हरिद्वार के लगभग 500 व्यक्तियों पर धुम्रपान और एल्कोहल का सेवन करने वाले लोगों का सैम्पलिंग किया गया। शोध में धुम्रपान (बीडी, सिगरेट और एल्कोहल-शराब व नशीले इंजेक्शन) को लेकर हरिद्वार की भयावह स्थिति का खुलासा हुआ है।
शोध छात्र अनिल वर्मा ने बताया कि जो व्यक्ति धुम्रपान का प्रयोग करते है उनका वजन रक्तचाप और निम्न रक्तचाप बाॅडी मास इन्टेक्स (बीएमआई), एफपीजी, पीपीजी, कोलेस्ट्राल तथा ट्राईग्लिसराइड में बढ़ोत्तरी हो जाती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इनका प्रभाव धुम्रपान करने से और अत्यधिक बढ़ जाता है, जो हमारी जीवन शैली को बुरी तरह से प्रभावित करता है। तथा टाईप-2 मधुमेह के होने के खतरे भी बढ़ जाते हैं। हरिद्वार में 500 लोगों पर अध्ययन कर यह देखा गया कि जो लोग शराब और धुम्रपान करते है वह टाईप-2 मधुमेह के होने के ज्यादा खतरे में चपेट जाते हैं।
उम्र 15-25 आयु वर्ग के लोगों पर 42 प्रतिशत शराब पाने वाले व 38 प्रतिशत धुम्रपान करने वाले लोगों पर 40 प्रतिशत टाईप-2 प्रकार की डाइबिटिज हुई है। उम्र 26-35 आयु वर्ग के लोगों पर 38 प्रतिशत शराब पाने वाले व 40 प्रतिशत धुम्रपान करने वाले लोगों पर 38 प्रतिशत टाईप-2 प्रकार की डाइबिटिज हुई है। उम्र 36-45 आयु वर्ग के लोगों पर 45 प्रतिशत शराब पाने वाले व 42 प्रतिशत धुम्रपान करने वाले लोगों पर 46 प्रतिशत टाईप-2 प्रकार की डाइबिटिज हुई है। उम्र 46-55 आयु वर्ग के लोगों पर 50 प्रतिशत शराब पाने वाले व 45 प्रतिशत धुम्रपान करने वाले लोगों पर 50 प्रतिशत टाईप-2 प्रकार की डाइबिटिज हुई है तथा उम्र 56-65 आयु वर्ग के लोगों पर 40 प्रतिशत शराब पाने वाले व 60 प्रतिशत धुम्रपान करने वाले लोगों पर 60 प्रतिशत टाईप-2 प्रकार की डाइबिटिज हुई है।
शोध निर्देशक प्रो0 पीसी जोशी ने इन गणनाओं के आधार पर बताया कि हरिद्वार शहर में शराब, धुम्रपान, जहरीले इंजेक्शन और अन्य व्यसनों के कारण युवा पीढ़ी का भविष्य चैपट होने के कगार पर है। यदि इस स्थिति को किसी अभियान के तहत नहीं रोका गया तो युवा पूरी तरह से व्यसन के जाल में फंस सकते है। इस सबका सीधा असर मधुमेह बीमारी से घिर जाना है। आज हरिद्वार शहर में लोगों की मौत उच्च रक्तचाप थमने के कारण मौत हो रही है। बी.पी. की प्रोबलम आम आदमी के जीवन का हिस्सा बनकर रह गयी है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रूप किशोर शास्त्री ने कहा कि हरिद्वार जनपद में व्यसन के खिलाफ अभियान चलाया जायेगा। वैदिक संस्कृति का जन जागरण करने के लिए विश्वविद्यालय का एक विभाग प्रसार कार्यक्रम के अन्तर्गत इस अभियान के लिए एक मसौदा तैयार कर जल्द शुरू करेगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो दिनेश भट्ट ने कहा कि जो व्यक्ति व्यसन करते है उनकी जीवन शैली पूरी तरह से खत्म होने के कगार पर आ जाती है। व्यक्ति को व्यसन नहीं करना चाहिए और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुसार इसका परित्याग कर देना चाहिए। शहर के युवाओं को व्यसन से बचाना है तो सामाजिक संगठन, पुलिस प्रशासन, प्रेस क्लब, शिक्षण संस्थान, राजनैतिक दल एक मंच पर आकर इस अभियान को स्कूलीय स्तर से शुरू करने का अंजाम दिया जा सकता है। यह अभियान रैली, गोष्ठी और परिचर्चाओं के माध्यम से इस तरह के व्यसनों पर शिकंजा कसा जा सकता है।

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