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भारत को समझने से पूर्व भारत के मूल स्वरूप को समझना होगा : श्रद्धेय आचार्य जी

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सोनी चौहान
केंद्रीय हिंदी संस्थान-आगरा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों से लगभग 38 देशों से हिंदी सीखने आए लगभग 125 विद्यार्थियों का एक दल रविवार को पतंजलि योगपीठ पहुँचा।
श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण महाराज ने कहा कि विश्व के किसी भी देश में आपको इतनी विविधता नहीं मिलेगी, जितनी भारत में है। भारत को समझने से पूर्व आपको भारत के मूल स्वरूप को समझना होगा। भारत के कण-कण में मानवता, संवेदना, करुणा, प्रेम तथा सहयोग करने की भावना निहित है।


इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों का परिचय पतंजलि से कराया। उन्होंने बताया कि लगभग 4000 वर्ष पूर्व एक महान् ऋषि हुए जिन्होंने योग की शुरुआत की। योग के आदिगुरु ‘महर्षि पतंजलि’ के नाम पर हमने पतंजलि योगपीठ की स्थापना की जो समाजसेवा में अहर्निश संलग्न है। आचार्य जी ने कहा कि हम भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति योग व आयुर्वेद के माध्यम से रोगियों का उपचार करते हैं। रोग की जाँच हम Modern Medicine System के माध्यम से करते हैं। उन्होंने बताया कि पूरे देश में हमारे लगभग 1500 चिकित्सालय हैं। जिनमें प्रतिमाह लाखों-करोड़ों रोगियों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया जाता है। आचार्य जी ने बताया कि हमारे पास EMR System है। जिसके माध्यम से हमने लगभग एक करोड़ रोगियों का डाटा सुरक्षित किया है। जो किसी भी संस्थान के पास उपलब्ध नहीं है।


आचार्य जी ने विद्यार्थियाें को पतंजलि द्वारा जनसेवार्थ प्रदान की जाने वाली सेवाओं की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 4000 से 5000 रोगियों को एकसाथ योग का प्रशिक्षण देने हेतु हमारे पास दो विशाल ऑडिटोरियम हैं। प्राकृतिक चिकित्सा हेतु लगभग 150 एकड़ में बना नेचुरोपैथी केन्द्र योगग्राम है। पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, आचार्यकुलम्, वैदिक गुरुकुलम्, वैदिक कन्या गुरुकुलम्, पतंजलि गुरुकुलम् तथा बाल गुरुकुलम् आदि शिक्षण संस्थान हैं जो बिना किसी लाभांश (No Profit No Loss) के सेवार्थ चलाए जा रहे हैं।
शोध संबंधी सेवाओं के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि हम धर्म को विज्ञान मानते हैं। पतंजलि के द्वारा अनुसंधान का बहुत बड़ा कार्य किया जा रहा है। पतंजलि अनुसंधान संस्थान में हमारे पास आधुनिक लैब, इन-विट्रो विभाग तथा प्रशिक्षित वैज्ञानिकों का बड़ा दल मौजूद है। हम योग, आयुर्वेद, खाद्य व हर्बल सौंदर्य प्रसाधन आदि पर अनुसंधान कर रहे हैं।


आचार्य जी ने बताया कि विश्व में लगभग 3 लाख 60 हजार प्रकार के पौधे पाए जाते हैं किन्तु विश्व की परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों में प्रयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों की जानकारी अभी तक मौजूद नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके लिए वर्ष 2010 में कार्य प्रारम्भ किया था। किन्तु इसकी जटिलता को देखते हुए उन्होंने इसे बीच अधर में छोड़ दिया। इसे पूरा करने का कार्य अब पतंजलि के माध्यम से किया जा रहा है। पतंजलि ने औषधीय पौधों की Check List बनाई है। जिसमें लगभग 65,000 औषधीय पौधों को संलग्न किया गया है। पतंजलि अनुसंधान संस्थान में विश्व भैषज संहिता (World Herbal Encyclopedia) पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस कार्य में लगभग 100 वैज्ञानिक अहर्निश संलग्न हैं। साथ ही पतंजलि के शोध-पत्र (Research Papers) विश्व की विख्यात पत्रिकाओं जैसे नेचर इत्यादि में आए दिन प्रकाशित होते रहते हैं।


कजाकिस्तान के एक विद्यार्थी ने कहा कि यह हमारे लिए सुनहरा अवसर है कि हमें भारतीय भाषा तथा भारत की संस्कृति को जानने व समझने का अवसर मिल रहा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा से जानकी देवी, समाजसेवी भास्कर एवं प्रियंका भारद्वाज उपस्थित रहे। श्रद्धेय आचार्य ने सभी विद्यार्थियों को स्वलिखित साहित्य व रुद्राक्ष की माला भेंट की।
विद्यार्थी अफगानिस्तान, अजरबेजान, बंगलादेश, बुल्गारिया, कैमरून, चीन, मिश्र, जापान, गुयाना, मौरिशस, नाइजिरिया, दक्षिण कोरिया, पोलैण्ड, रोमानिया, श्रीलंका, मोरक्को, कजाकिस्तान, थाईलैण्ड, त्रिनिदाद, ट्यूनेशिया, तुर्की, युक्रेन, उजबेकिस्तान तथा रूस आदि देशों से हिंदी विषय में स्नातक तथा डिप्लोमा कोर्स करने हेतु भारत आए हैं।

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