इश्योरेंस कंपनी ने नहीं दिया पीड़ित का क्लेम, आयोग ने धनराशि मय ब्याज के देने के सुनाए आदेश

उत्तराखंड कारोबार हरिद्वार


नवीन चौहान
इश्योरेंस कंपनी ने बीमा क्लेम पीड़ित को नहीं दिया तो जिला उपभोक्ता आयोग की शरण में गए। आयोग ने बीमा कंपनी प्रबंधक को बीमा धारक के इलाज खर्च राशि 8 लाख 27 हजार छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से, शिकायत खर्च व अधिवक्ता फीस के रूप में पांच हजार रुपये शिकायतकर्ता महिला को अदा करने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता महिला मणि जैन पत्नी नवप्रीत जैन निवासी राजपूताना रुड़की ने प्रबंधक, बीमा कंपनी स्टार हेल्थ एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड रुड़की के खिलाफ एक शिकायत आयोग में दायर की थी। उसके पति ने बीमा कंपनी से एक बीमा पॉलिसी 30 मार्च 2016 को हेल्थ प्लान की ली थी। पॉलिसी में शिकायतकर्ता महिला, उसके पति व दो बच्चे बीमित थे। शिकायतकर्ता के पति ने बीमा कंपनी को निर्धारित प्रीमियम अदा किया था। शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि उक्त बीमा पॉलिसी 29 मार्च 2019 तक वैध चली आती थी। जिसमें उसके पति को बीमा राशि पांच लाख रुपये, बोनस राशि एक लाख पैंतीस हजार रुपये व रिचार्ज बेनिफिट डेढ़ लाख रुपये बताया गया था। शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि बीमा कंपनी के प्रबंधक ने पॉलिसी जारी करने से पहले परिवार के सदस्यों का मेडिकल परीक्षण कराया था। जिसमें स्वस्थ पाए जाने पर पॉलिसी जारी की गई थी। बीमा अवधि में शिकायतकर्ता महिला के पति को बीमारी के चलते दिल्ली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां जनवरी 2019 में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी। बीमा कंपनी आरोप लगाया था कि बीमा पॉलिसी कैशलेस होने के बावजूद भी उपचार के दौरान पैसे का भुगतान नहीं हुआ था। जबकि पॉलिसी देने के दौरान कैशलेस होने का आश्वासन दिया गया था। शिकायतकर्ता के पति के इलाज में 8 लाख 27 हजार 584 रुपये खर्च हुए थे। जब शिकायतकर्ता महिला ने उपचार बिल राशि जमा कराते हुए बीमा कंपनी से उक्त उपचार में खर्च राशि की मांग की। तो बीमा कंपनी ने कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की।

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