हरिद्वार में ऑनलाइन कारोबार से खुदरा व्यापार धड़ाम, कारोबारियों ने सिर पीटा

उत्तराखंड कारोबार

नवीन चौहान
हरिद्वार में ऑनलाइन कारोबार से खुदरा व्यापार पूरी तरह धड़ाम हो गया है। दीपावली व तमाम धार्मिक त्योहारों के इस मौसम में खुदरा बाजार पूरी तरह से चौपट हो गया है। हरिद्वार में ज्वालापुर का कटहरा बाजार, कनखल की दुकानों पर ग्राहक गायब है। जबकि हरिद्वार के बड़े—बड़े शोरूमों में सन्नाटा पसरा है। युवा वर्ग ऑनलाइन शॉपिंग कर रहा है। जिसके चलते खुदरा कारोबार धड़ाम हो गया है। अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो आने वाले दिनों में खुदरा व्यापार की हालात बेहद खराब हो जायेगी।
वर्तमान का युवा वर्ग अपना अधिकतम समय मोबाइल व कंप्यूटर को देते है। इसी के साथ खरीददारी करने के लिए ऑनलाइन बाजार का चयन करते है। ऑनलाइन बाजार से मिलने वाले नए—नए आफर के लालच में युवा वर्ग अपनी पसंद के सामान की बुकिंग कराता है। जिसके चलते ऑनलाइन सामान बेचने वाली तमाम कंपनियों ने शानदार शोरूमों और खुदरा व्यापारियों की नाक में दम कर दिया है। युवा वर्ग मॉल या दुकान पर जाने के बजाए मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, कॉस्मेटिक्स आदि का ऑर्डर ऑनलाइन कर रहे हैं। कम कीमत पर घर बैठे सामान की डिलिवरी ले रहे हैं। ई-कॉमर्स से जुड़ी फर्में इतना शानदार ऑफर देती हैं कि ठुकराना कठिन होता है। उन्हें एक-एक दिन में अरबों रुपये के ऑर्डर मिल रहे हैं। जबकि खुदरा व्यापारी मानसिक रूप से परेशान हैं। निर्माता कंपनियां हैरान हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि इस चुनौती का सामना कैसे किया जाए। कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन हटने के बाद से बाजार में रौनक की उम्मीद लगाए बैठे दुकानदारों को निराशा हाथ लगी है। हरिद्वार के हालातों की बात करें तो यहां दुकानदारों आर्थिक संकट का सामना कर रहे है। दीपावली त्योहारों पर कारोबार में उछाल की उम्मीद लगाए बैठे दुकानदारों को सबसे बड़ा झटका आन लाइन बाजार से मिल रहा है। ई-कॉमर्स से जुड़ी तमाम कंपनियों के शानदार डिस्काउंट आफर से ही खुदरा व्यापारी परेशान है। वही दूसरी ओर से खुदरा व्यापारियों की बात करें तो उनको कर्मचारियों का वेतन व तमाम खर्च की पूर्ति करना संभव नही हो पा रहा है।
व्यापारी नेता डॉ विशाल गर्ग ने बताया कि ऑनलाइन बाजार से खुदरा कारोबार को काफी नुकसान हो रहा है। कोरोना आपदा के संकट से उबरने के लिए व्यापारियों कोशिश कर रहे है। दीपावली पर्व पर कारोबार में एक तेजी आने की उम्मीद थी। लेकिन वह उम्मीद भी निराशा में बदल रही है।
प्रॉपटी कारोबार भी पड़ा मंदा
साल 2014 के बाद से प्रॉपटी कारोबार की हालत बेहद खराब है। केंद्र की मोदी सरकार के नोटबंदी के बाद से प्रॉपटी कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया। नामी गिरामी बिल्डर्स के प्रोजेक्ट अधूरे रह गए। करीब पांच साल के भीतर प्रॉपटी के दामों में कोई बढ़ोत्तरी नही हुई। इसके बाबजूद भी कारोबार में तेजी नही आई। प्रॉपटी कारोबार से जुड़े तमाम लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे है।

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